google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: Quotes Related Practical Life

Quotes Related Practical Life

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1.माता - 
पालन पोषण करने और भोजन कराने में माता के समान ध्यान रखने वाली अथवा रखनेवाला कोई नहीं है। माता बालक का प्रथम गुरु होती है और क्षमा करने में पृथ्वी के समान सहनशील होती है। जैसे पृथ्वी पर हम अपना मल-मूत्र तथा कूड़ा कचरा फेंकते रहते हैं परन्तु वह उफ तक नहीं करती है। इसलिए वह पूजनीय है, बड़े भाग्यवाली है, पुण्यशीला है, घर की रोशनी है उनकी छाया हमेशा तृप्ति की अनुभूति होती है। उसका हृदय विशाल है जो तुरन्त ही द्रवित और तुरन्त ही प्रसन्न हो जाती है। माता के त्याग, तपस्या और सपर्पण का मूल्य कोई नहीं चुका सकता है। माता की ममता की एक - एक बूंद अमृत के महासागर से भी अधिक मीठी है। मनुष्य के लिए माता रूपी प्रसाद अतुलनीय है इसलिए उसे माता कहते हैं। माता की कोमल थप्पी शान्ति का निकेतन है। 
माता के शरीर का पालन पोषण करने वाली, चिन्ता के समान देह को सुखानेवाली, स्त्री के समान शरीर को सुख देनेवाली और विद्या के समान शरीर अलकृंत करनेवाली दूसरी कोई वस्तु नहीं है। भाई-बहन को एक करनेवाली माता ही है। संसार में ओर कुछ है सब झूठा और पाखंड है एक माता ही है जो सत्य है। माता का हृदय वात्सल्य से गद्गद हो जाता है। 
पंचतंत्र में कहा है कि जिसके घर में माता न हो और स्त्री अप्रियवादिनी हो उसे वन में चले जाना चाहिए क्योंकि उसके लिए घर और वन एक समान है। 
2.विद्या-
माता के बाद विद्या का ही स्थान आता है। विद्या में कामधेनु के समान गुण हैं, यह असमय में ही फल देने वाली है, यह विदेश में माता के समान रक्षक और हितकारिणी होती है इसलिए विद्या को गुप्त धन कहा गया है। विद्या माता के समान रक्षा करती है, पिता के समान हितकार्यो में नियुक्त करती है, दु:ख को दूर करके पत्नी के समान आनंद प्रदान करती है, चहुँ दिशाओं में कीर्ति को फैलाती है, धन की प्राप्ति कराती है। कल्पवृक्ष के समान विद्या क्या नहीं देती? सभी कुछ तो प्रदान करती है। 











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