google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: Golden Tips And Useful Tips For Students

Golden Tips And Useful Tips For Students

Golden Tips And Useful Tips For Students

1.विद्यार्थियों हेतु स्वर्ण सूत्र(Golden Tips for Students)-

(1.)सुबह सवेरे जब भी अध्ययन करना शुरू करें तो प्रफुल्लित, तरोताजा तथा एकाग्रचित होकर अध्ययन प्रारम्भ करें.
(2.)मन में प्रसन्नता का भाव रखें, दु:ख व पीड़ा को पास न फटकने दें. दु:ख व पीड़ा प्रगति व उन्नति के अवरोधक है.
(3.)युवाकाल तप, साधना व कठोर परिश्रम करने का है अतः सुविधाभोगी प्रवृत्ति न रखें.
(4.)आपके अन्दर प्रसुप्त अनन्त क्षमताएं हैं जो स्वत: ही प्रकट नहीं होगी बल्कि आपको संकल्प शक्ति तथा संघर्ष बल पर प्रकट करनी होगी.

Golden Tips And Useful Tips For Students

Golden Tips And Useful Tips For Students

(5.)हमारे अन्दर अपार सम्भावनाएं तथा योग्यताएं छिपी हुई है जो विपत्ति तथा कठिनाइयों से निखरती है. अतः कठिनाइयों से मुँह नहीं मोड़े बल्कि मन से स्वागत करें.
(6.)करोड़ो व्यक्ति जन्म लेते हैं और मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं परन्तु उन्हीं का जीवन सार्थक होता है जिनको आत्मज्ञान हुआ है अर्थात् अपने आप को पहचाना है. ऐसे व्यक्ति अपनी योग्यता को भीतर ही रखकर समाप्त नहीं हो गए हैं.
(7.)दुर्व्यसनों से अच्छे से अच्छे व्यक्ति का पतन हो जाता है.
(8.)अशुभ कर्म का बीज पहले विचार बनता है फिर कर्म बनता है तथा कर्म से आदत व संस्कार का निर्माण होता है.
(9.)शुभ, कल्याणकारी तथा हितकारी विचारों से व्यक्तित्व निखरता है.
(10.)आत्मविश्वास, आत्मज्ञान और आत्मसंयम से व्यक्ति पूर्णता को प्राप्त होता है.
(11.)चरित्र का निर्माण एक कठोर तप व साधना है. विद्यार्थी काल इसको आचरण में उतारने का सबसे उत्तम समय है.
(12.)अपनी समस्याओं, कठिनाइयों को अपने माता-पिता व अभिभावक के साथ साझा करे.
(13.)अपनी आवश्यकताओं को न्यूनतम रखें तथा फैशन परस्ती से दूर रहें.
(14.)दूसरों की न तो निंदा करें और न ही दूसरों की निन्दा सुनने में रस लें.
(15.)गोल गोल व मीठी मीठी बात करनेवालों से सावधान रहें.
(16.)किसी का भी अपमान न करें.
(17.)यह ध्यान रखें कि स्वयं के कारण कोई दु:खी व कष्ट का अनुभव न करें.
(18.)यदि किसी के प्रति गलतफहमी है तो आपस में विचार विमर्श करके गलतफहमी को दूर करें.
(19.)यदि किसी से गल्ती हो जाये तो यह सोचकर भूल जाये क्योंकि गलती करना मानवीय प्रकृति है.
(20.)प्रतिदिन कुछ न कुछ नया सीखना चाहिए. हम रात को ऐसे ही न सो जाये जैसे पिछले दिन सोये थे.
(21.)चिंता के बजाय चिंतन करे.
(22.)समय अमूल्य हैं, बीता हुआ समय वापिस नहीं पाया जा सकता है अतः समय की कद्र करें.
(23.)किसी का सहयोग करने पर उसका गुणगान करते न फिरे.
(24.)दूसरो को सहयोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए न करें.
(25.)किसी भी कार्य को करने में अपना सौ प्रतिशत देने का प्रयत्न करें.


2.विद्यार्थियों हेतु उपयोगी सूत्र(Useful Tips For Students)-

(1.)हँसी-मजाक वही उचित है जो दूसरों के दिल को खुश कर दे. ऐसी हँसी-मजाक करना उचित नहीं है जो किसी को ठेस पहुँचा दे.
(2.)अपने साथियों की भावनाओं का ध्यान रखें.
(3.)न तो ज्यादा चुप रहे और न ज्यादा बोलें.
(4.)यदि आपके साथी कोई अच्छा कार्य करते हैं तो उसकी प्रशंसा करें.
(5.)आज का काम आज ही निपटा दे, उसे अगले दिन के लिए टालना उचित नहीं है.
(6.)किसी का कोई उपकार किया हो तो उसे प्रत्युपकार की आशा न रखें.
(7.)कुछ भी बोलने से पहले ठीक तरह से उस पर सोच विचार कर लें.
(8.)मन में बुरे विचारों को प्रश्रय न दें. हालांकि यह कार्य है तो कठिन लेकिन निरन्तर अभ्यास से यह सम्भव है.
(9.)कुछ समय मनोरंजन के लिए भी निकालें जिससे आप पर तनाव हावी न हो सके.
(10.)यदि साथियों से वाद-विवाद हो जाए तो उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाएं.
(11.)यदि आगे बढ़ना चाहते हैं तो झूठ, पाखंड से बचें. अपनी अन्तरात्मा का शोधन करते रहें.
(12.)अपना कौन है? पराया कौन है? इसकी परख करते रहें.
(13.)मन में हमेशा पवित्र, शुद्ध विचारों को ही कम्पनी दें. अशुभ विचारों को दूर भगा दे.
(14.)पुरुषार्थी व्यक्ति को मदद परमात्मा करता है अतः हमेशा पुरुषार्थ करते रहें.
(15.)सदाचार एकाएक व्यवहार में नहीं आता है धीरे-धीरे अभ्यास करने तथा धैर्य धारण करने से हमारा आचरण सदाचार युक्त होता जायेगा.
(16.)आध्यात्मिकता को अपनायें तथा अनासक्त कर्मयोग को समझकर उसके अनुसार आचरण करने का प्रयास करे. हालांकि यह कार्य है तो कठिन लेकिन लगातार प्रयास करने एकदिन सफलता अवश्य मिल ही जायेगी.
(17.)शिक्षा, सत्संग, स्वाध्याय को अपने जीवन का अंग बनाये.
(18.)धर्म का पालन करें. धर्म का अर्थ सम्प्रदाय से नहीं है बल्कि इस लोक तथा परलोक (आगामी जीवन) में सुख मिले वह धर्म है.


(19.)संकट तथा हानि उठाने के बाद व्यक्ति ओर अधिक विनम्र हो जाता है.
(20.)प्रशंसा के द्वारा शत्रु को भी मित्र बनाया जा सकता है.
(21.)अपना ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य पर रखें.

(22.)दुर्जनों से दूर ही रहें. दुर्जनों से न तो दोस्ती अच्छी है और न दुश्मनी अच्छी है क्योंकि कोयले को हाथ में ले लें तो हाथ काला कर देता है तथा अग्निरुप हो तो हाथ जला देता है.

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