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what is unemployment and solution in current education?

what is unemployment and solution in current education

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बेरोजगारी की समस्या एवं समाधान(.what is unemployment and solution in current education)-
.what is unemployment and solution in current education

what is unemployment and solution in current education 

(1.)शिक्षा की जो व्यापक परिभाषा है उसके अनुसार तो शिक्षित व्यक्ति बेरोजगार हो ही नहीं सकता है. परन्तु वर्तमान में भारत में जो शिक्षा प्रणाली प्रचलित है उसके कारण बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है.ऐ

(2.)वर्तमान शिक्षा युवाओं को साक्षर करती है जिसमें युवाओं का सर्वांगीण विकास नहीं होता है. जब तक युवाओं को विवेकवान, योग्य तथा पात्र नहीं किया जायेगा यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती जायेगी.

(3.)वर्तमान शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थी को मात्र डिग्री मिलती है और डिग्री प्राप्त करके उसमें अहंकार उत्पन्न हो जाता है जिससे वह परिश्रम करने से जी चुराता है, कोई छोटा मोटा व्यवसाय करना नहीं चाहता है. डिग्री प्राप्त करके सरकारी नौकरी प्राप्त करना चाहता है क्योंकि सरकारी नौकरी प्राप्त करने के पीछे सेवा करने की भावना नहीं होती है बल्कि उसके पीछे भावना है कि कम से कम काम करो, मन करे तो काम करो अन्यथा मत करो अर्थात् जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं कोई रोकनेवाला, टोकनेवाला नहीं, कोई निरीक्षण करने वाला नहीं. वेतनमान इतना कि आराम से जिन्दगी कट जाती है, इसके अतिरिक्त समय समय पर मँहगाई भत्ता, पेंशन, ग्रेच्युअटी की सुविधा,कई प्रकार के समय समय पर अवकाश लेने की सुविधा. ये सब चीजें युवाओं को आकर्षित करती है. भ्रष्टाचार के रूप में ऊपर इन्कम हो जाती है वो अलग यानी पाँचो ऊँगली घी में.

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(4.)जब युवाओं का शिक्षा अर्जित करने के पीछे मकसद ही यही है कि पढ़ लिखने के बाद नौकरी प्राप्त करना. इसलिए डिग्री लेने के बाद जब नौकरी नहीं मिलती है तो युवाओं का सरकार से असंतोष ही इस बात को लेकर है कि उनके लिए सरकार नौकरी की व्यवस्था नहीं कर रही है. अब सरकार सभी युवाओं को नौकरी तो दे नहीं सकती है, मात्र 10-15%को ही नौकरी दे सकती है. तात्पर्य यही है कि युवा पढ़ लिखकर परिश्रम का कार्य नहीं करना चाहता है.
(5.)दूूसरा कारण है जनसंख्या का विस्फोट. भारत में जनसंख्या गुणोत्तर रुप से बढ़ती जा रही है.
(6.)तीसरा कारण है मशीनों के आविष्कार के कारण छोटे छोटे कुटीर उद्योग नष्ट होते जा रहे हैं.
(7.)चौथा कारण है कि कम्प्यूटर के कारण बीस-पचास व्यक्तियों का कार्य एक व्यक्ति ही कर सकता है.
समाधान :-(1.) मशीनों तथा कम्प्यूटरों का प्रयोग होने के बावजूद यदि युवावर्ग को सैद्धांतिक के साथ साथ व्यावहारिक शिक्षा भी दी जाये तो इसका समाधान हो सकता है. इसके लिए शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करना होगा. आजादी मिलते ही शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करना आसान था. अब 70वर्ष व्यतीत होने के पश्चात शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करना आसान कार्य नहीं है परन्तु असम्भव भी नहीं है. यदि सरकार धीरे धीरे शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करे तो दीर्घकाल में जाकर यह समस्या हल हो सकती है अन्यथा मौजूदा व्यवस्था से तो हालात ओर बिगड़ेंगे.
(2.)दूसरा समाधान यह है कि माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों को कोई भी हुनर सीखाना प्रारम्भ करे तो शिक्षा पूर्ण होते ही बेरोजगारी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा.
(3.)तीसरा समाधान यह है कि यदि युवावर्ग पुरुषार्थी हो, परिश्रमी हो तो अध्ययन के साथ साथ कोई भी छोटा मोटा कार्य जैसे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना, कोचिंग में पढ़ाने का कार्य, अखबार वितरण करना या अन्य कोई छोटा मोटा कार्य करना प्रारंभ करे. अर्थात् पार्टटाइम थोड़ी बहुत कला भी कला सीखनी चाहिए.


(4.)चौथा समाधान यह है कि युवावर्ग फैशनपरस्ती से दूर रहे, फिजूलखर्ची करने के बजाय बचपन से ही जो पाकेटमनी के रुपये मिले उनकी बचत करना प्रारंभ कर दे तो स्कूल, कालेज की शिक्षा समाप्त होते ही उस बचत की धनराशि से कोई भी छोटा मोटा कार्य करना प्रारंभ कर दे.
इस प्रकार युवावर्ग सरकारी नौकरी न मिलने की शिकायत छोड़कर अपना समय कठोर पुरुषार्थ, समझदारी व सुदृढ़ संकल्प को बढ़ाने के लिए करे तो बेरोजगारी की समस्या का सामना कर ही नहीं सकता है.

(5.)आजकल आनलाईन भी घर बैठे व्यवसाय कर सकता है कहीं बाहर जाने की जरूरत ही नहीं है परन्तु यह तभी संभव है जबकि आप सैद्धान्तिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा भी अर्जित करते हैं और इसके लिए आपको खुद या माता-पिता को ही अध्ययन में पार्टटाइम के रूप कोई भी जाॅब अर्थात् हुनर सीखना होगा। आनलाईन में ब्लाॅग लेखन, यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करना, आनलाईन मार्केटिंग करना। इस प्रकार ढेरों ऐसे आनलाईन के जाॅब जिनको विद्यार्थी काल से ही सीख सकते हैं। कोई भी कार्य छोटा कोई नहीं होता है, आपको अपनी रुचि और जिज्ञासा को पहचानकर तराशने की जरूरत है। आपमें रुचि, जिज्ञासा व कठोर परिश्रम करने का जुनून होना चाहिए। मार्केट का रोमर न देखकर यह देखना चाहिए कि आपको महारत किस कार्य में है क्योंकि पत्थर में भी पेड़ उग जाते हैं। 

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