google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: Who is Responsible For Education || Are Teachers Responsible

Who is Responsible For Education || Are Teachers Responsible

Who is Responsible For Education || Are Teachers Responsible For education

शिक्षा का उत्तरदायित्व किस पर?(Who is Responsible For Education)-

(1.)शिक्षा आजीवन चलनेवाली प्रक्रिया है इसलिए व्यक्ति एवं समाज के निर्माण में शिक्षकों, अभिभावकों, धर्मोपदेशकों, समाजसुधारकों, चिन्तकों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों, कलाकारों, सुसम्पन्नों, न्यायाधीशों इत्यादि का अपने अपने ढंग का योगदान होता है. परन्तु व्यक्ति का निर्माण बाल्यावस्था एवं युवावस्था में ही प्रमुख रूप से होता है. प्रारम्भ में बालक सबसे अधिक गुरुजनों एवं अभिभावकों के सम्पर्क में रहता है. इनमें से अभिभावक शिक्षण कला में प्रवीण नहीं होते हैं ऐसी दशा में संस्कारित किस प्रकार किया जाए इससे अनजान रहने के कारण उनका इतना उत्तरदायित्व नहीं है परन्तु शिक्षक इस कर्त्तव्य से बच नहीं सकते हैं.
Who is Responsible For Education,Are Teachers Responsible

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(2.)यदि शिक्षक यह कहकर मुक्त होना चाहे कि उनकी जिम्मेदारी मात्र पाठ्यक्रम पूर्ण करवाना है और इसी का वेतन मिलता है।पहली बात तो यह है कि पाठ्यक्रम को पूर्ण करने के अनेक साधन विकसित हो गए हैं तो अभिभावक बालकों को केवल पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के लिए उनके पास ही क्यों भेजेंगे? दूसरी बात यह है कि ऐसी स्थिति में अभिभावकों, बालकों से यश और सम्मान नहीं मिल सकता है. तीसरी बात यह है कि उन्हें आत्मिक संतोष भी नहीं मिलेगा.
(3.)धर्मोपदेशकों, समाजसुधारकों, चिन्तकों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों, कलाकारों, सुसम्पन्नों के सम्पर्क में थोड़ी देर के लिए सम्पर्क में आते हैं उतने समय में वे उनमें तीव्र उत्तेजना पैदा कर सकते हैं जो पर्याप्त नहीं है. जैसे किसी पौधे को लगाने पर एक बार पानी देने से वह विकसित नहीं होता है बल्कि उसको विकसित करने के लिए नियमित रूप से पानी देना होता है और उसकी नियमित रूप से देखभाल भी करनी होती है. इसलिए बालकों को सुसंस्कारवान, प्रतिभावान, तेजस्वी, प्रखर बनाने का कार्य वही कर सकता है जो उनके नियमित रूप से सम्पर्क में हो और इस कला को जानता हो. ऐसा व्यक्तित्व शिक्षक ही है, उसी से यह आशा की जा सकती है.
(4.)बालकों में प्रतिभा तथा संस्कारों को उभारने की जिम्मेदारी कानूनी रूप से तथा वेतनमान की शर्तों में शिक्षक की जिम्मेदारी न होने पर बाध्य तो नहीं किया जा सकता. परन्तु शिक्षक पद की गरिमा व नैतिकता के आधार पर यदि वे इस जिम्मेदारी को नहीं उठाते हैं तो समाज, अभिभावक व बालक उन्हें क्षमा नहीं करेगा और न वे सम्मान के पात्र ही होंगे.
(5.)वर्तमान शिक्षा पद्धति में सामान्यतः यही परिपाटी चल रही है कि शिक्षक मात्र पाठ्यक्रम पूरा कराके यह सन्तोष कर लेते हैं और यह सन्तोष कर लेते हैं कि उन्हें वेतन पाठ्यक्रम पूरा कराने का मिलता है इसलिए अतिरिक्त उत्तरदायित्व वे क्यों वहन करें? बालकों के जीवन निर्माण करने का उन्होंने अकेले ठेका नहीं ले रखा है और न अकेले इसके लिए जिम्मेदार हैं. इस प्रकार जब शिक्षा को मात्र व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा व समझा जाता हो तो देश के भविष्य की कल्पना की जा सकती है कि क्या होगी?

निष्कर्ष :- प्रश्न मानवीय मूल्यों के संरक्षण तथा उन्नत करने का है, उसे हल करना ही होगा. जैसा कि उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि शिक्षक के अलावा अन्य कोई व्यक्ति इस जिम्मेदारी को वहन नहीं कर सकता है. इसलिए इच्छा व अनिच्छा से लोक कल्याण व व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए यह उत्तरदायित्व शिक्षकों को ही वहन करना होगा भले ही संवैधानिक, कानूनी रूप से वे बाध्य न हो परन्तु नैतिक दृष्टिकोण से वे इसके लिए जिम्मेदार समझे जाएंगे. इसका अन्य कोई विकल्प है भी नहीं. यदि इस उत्तरदायित्व को नहीं निभाया तो लोग उन्हें क्षमा नहीं करेंगे.

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