google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: What are the causes and solutions to JNU violence?

What are the causes and solutions to JNU violence?

What are the causes and solutions to JNU violence?

1.जेएनयू हिंसा के क्या कारण और समाधान हैं?(What are the causes and solutions to JNU violence?)-

JNU(DELHI),What are the causes and solutions to JNU violence?

JNU(DELHI), What are the causes and solutions to JNU violence?

शिक्षा प्राप्त करने के जो स्थान है उनको कोई जमाने में शिक्षा के मंदिर कहा जाता था परंतु आज के विश्वविद्यालयों तथा विद्यालयों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे यह कोई अखाड़े के मैदान है ।शिक्षा का अर्थ है जो हमें अनुशासन सिखाती है, जो हमें जीवन का मार्ग दिखाती है, सांसारिक कर्तव्यों का पालन करना और आध्यात्मिक मार्ग का दिग्दर्शन कराती है।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(दिल्ली), जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय,दिल्ली (दिल्ली),अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी(अलीगढ़ ) जादवपुर विश्वविद्यालय इत्यादि यूनिवर्सिटी तथा इसी प्रकार की अन्य यूनिवर्सिटीज को देखकर ऐसा लगता ही नहीं है कि यह शिक्षा प्राप्त करने के केंद्र हैं।
5 जनवरी ,2020 को जेएनयू कैंपस में छात्रों पर लाठी, डंडों से लैस नकाबपोशों के हमले में कई लोग घायल हो गए।छात्र-छात्राओं तथा टीचर्स को पीटा गया। जेएनयू के तीन हॉस्टलों साबरमती हाॅ्स्टल, पेरियार हाॅस्टल,माही मांडवी हाॅस्टल में तोड़फोड़ की गई ।करीब 2 दर्जन लोग घायल हो गए। निश्चित रूप से हिंसात्मक तरीके से इस प्रकार की कार्यवाही करना निंदनीय है,हम इसकी घोर निंदा करते हैं।
आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें ।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके ।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.हिंसा के कारण (Due to violence)-

अब हम इस झगड़े के कारण के बारे में बताते हैं कि यह झगड़ा किस प्रकार शुरू हुआ। यहां एक बड़ा सवाल यह है कि जेएनयू के कुछ छात्रों ने अन्य छात्रों को अगले सेमेस्टर में शामिल होने से रोकने की कोशिश क्यों की ?यानि जो छात्र-छात्राएं पढ़ना चाहते थे उनको छात्रों के एक गुट ने रोकने की कोशिश क्यों की। उन्होंने सर्वर को डाउन कर दिया। वाई-फाई का कनेक्शन हटा दिया जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की फीस जमा करने के लिए तैयार था, ऐसे में इन छात्रों ने उनकी फीस जमा करने से क्यों रोका? झगड़ा यहीं से शुरू हुआ।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस वृद्धि की थी। कुछ छात्रों ने फीस वृद्धि के खिलाफ प्रोटेस्ट करना शुरू कर दिया जबकि अन्य छात्रों को फीस वृद्धि से कोई परेशानी नहीं थी।फीस वृद्धि के मामले में स्पष्ट है कि दो गुट बन गए और भिड़ गए। जब छात्र ही फीस वृद्धि को लेकर दो गुटों में बंट गए तो विश्वविद्यालय प्रशासन को कैसे रोक सकते हैं?
Also Read This Article-What should be the nature of Indian education?

3.जेएनयू का वर्तमान स्टेटस(Current status of JNU)-

JNU(DELHI),What are the causes and solutions to JNU violence?

JNU(DELHI),What are the causes and solutions to JNU violence?

जेएनयू दक्षिणी दिल्ली में 1019 एकड़ में स्थित है। जेएनयू की जमीन की कीमत सबसे महंगी जमीन की कीमतों में शामिल है।शैक्षणिक संस्थाओं की कीमत का आकलन किया जाए तो ये दस करोड़ रुपए प्रति एकड़ की दर है,इस हिसाब से जेएनयू की जमीन की कीमत 10,000 करोड़ रूपए होती है ।इस एरिया में कमर्शियल रेट की बात करें तो 100 करोड़ रुपए प्रति एकड़ की दर है,इस रेट से जेएनयू की कॉमर्सियल कीमत एक लाख करोड़ रुपए होती है। जेएनयू के छात्र इतनी महंगी जमीन पर तथा सबसे शानदार एरिया में शिक्षा अर्जित करते हैं।केंद्र सरकार का शिक्षा बजट लगभग 90000 करोड रूपए है यानी जेएनयू केंपस की कीमत केंद्र सरकार के बजट की बराबर है।

4.जेएनयू की बर्बादी के कारण(Due to the destruction of JNU)-

इतनी शानदार जगह पर शिक्षा अर्जित करने का मौका मिला हुआ है उसकी बर्बादी की जा रही है‌। इस बर्बादी के कई कारण है ।जेएनयू के आसपास कई राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय हैं तथा न्यूज़ चैनल के कई ऑफ़िस भी इन्हीं के आसपास हैं।
जेएनयू पूरे देश में तब हाईलाइट हुआ अफजल गुरु को फांसी हुई थी ।तब भी इन्हीं जेएनयू के मुट्ठी भर छात्रों ने देश विरोधी नारे लगाए थे जिसका बाकायदा जीन्यूज़ चैनल ने एक वीडियो जारी किया था ।उस वीडियो को बाकायदा कोर्ट ने एवीडेंस के रूप में माना था ।इसके पश्चात इस जेएनयू में देश विरोधी मुट्ठी भर छात्र सक्रिय हो गये। उनमें सस्ती राजनीति को पाने की होड़ लग गई। इसके पश्चात इन छात्रों में राजनैतिक भूमि तैयार करने का मकसद शामिल हो गया और इसके जरिए भारत की राजनीति में एंट्री करने का मकसद शामिल हो गया।छात्रों के हित व कल्याण के लिए राजनीति करने तक तो राजनीति ठीक है परंतु छात्रों के हित व कल्याण से प्रसिद्धि देर से मिलती है।इसलिए किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर हुड़दंग करना,प्रोटेस्ट करना,विश्वविद्यालय या विद्यार्थियों से संबंधित कोई इश्यू न हो तो भी उस पर भी आंदोलन करना। जैसे सीएए और एनआरसी का जेएनयू के विद्यार्थियों से क्या लेना-देना है? परंतु जामिया,जेएनयू व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने उसमें भी अपनी टांग अड़ाने से बाज नहीं आए। दरअसल अब जेएनयू के छात्रों को प्रसिद्धि पाने और राजनीति में जाने का चस्का लग चुका है। इसको कुछ राजनीतिक पार्टियां व कुछ न्यूज़ चैनल और तथाकथित बुद्धिजीवी समर्थन देते हैं।अब यह केंद्र शिक्षा के केंद्र नहीं बल्कि हिंसा के केंद्र बनते जा रहे हैं ।एक तरह से यह कहा जाए कि उक्त यूनिवर्सिटी एक ज्वालामुखी पर खड़े हैं जो कभी भी फट सकते हैं।अब इनके लिए देश, विश्वविद्यालय के नियम, कानून मायने नहीं रखते हैं बल्कि इनका अपना कानून व नियम है। इन्होंने जेएनयू को आईलैंड में तब्दील कर दिया है।जहां पुलिस,देश व विश्वविद्यालय का कोई नियम,कायदा,कानून नहीं चलता है। ऐसी शानदार यूनिवर्सिटी की विश्व के शिक्षण संस्थाओं में 600 से 800 के बीच नंबर आता है।यहां के शिक्षा के स्तर में गिरावट का यह नमूना है।हर बात पर प्रोटेस्ट करना एक तरह का फैशन बनता जा रहा है।दिल्ली भारत की राजधानी है इसलिए कोई भी बात न्यूज़ की हेडलाइन बन जाती है‌।जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय अब सस्ती राजनीति तथा देश विरोधी ताकतों के केंद्र बनते जा रहे हैं।जेएनयू में कुछ छात्र अपनी राजनीति को चमकाने के लिए प्रवेश करते हैं,वे यहां पढ़ने के लिए नहीं आते हैं ।राजनीति भी ये घटिया स्तर की करते हैं जिससे दुनिया में देश की छवि खराब होती है।
जेएनयू में अधिकांश विद्यार्थी पढ़ाई करना चाहते हैं परंतु कुछ विद्यार्थी किसी न किसी माध्यम से न्यूज़ में बने रहने के लिए इस तरह की नौटंकी आए दिन करते रहते हैं। जेएनयू में हुई हिंसा के लिए बाहरी तत्व भी शामिल हो सकते हैं जबकि जेएनयू में कुछ छात्र देश विरोधी कार्यों में लिप्त हो।ये कहावत है कि घर का भेदी लंका ढहावे।
प्रश्न- जेएनयू, एएमयू और जामिया जैसे विश्वविद्यालयों को अपना पाठ्यक्रम समाप्त करने और परीक्षा आयोजित करने का समय कब मिलता है?
उत्तर-(1.)जेएनयू,एएमयू और जामिया जैसे विश्वविद्यालयों में पढ़ाई नाममात्र की होती है।इन विश्वविद्यालयों में कुछ मुट्ठी भर छात्रों को अपनी राजनीतिक भूमि तैयार करनी होती है।
(2.)जो विद्यार्थी इन विश्वविद्यालयों में प्रोटेस्ट, आंदोलनों को जायज नहीं मानते हैं।वे जब इनको रोकने में असमर्थ रहते हैं तो स्वयं अपने स्तर पर तैयारी करते हैं। जैसे आनलाईन कोर्सेज करते हैं।
(3.)कुछ विद्यार्थी कोचिंग और ट्यूटर की मदद लेते हैं, इसके बावजूद भी काॅलेज की पढ़ाई की पूर्ति नहीं हो सकती है न।
(4.)बहुत से विद्यार्थी अपनी खुद से तैयारी करके एक्जाम देते हैं।
(5.)इस प्रकार की गतिविधियों के कारण ही विश्व में 600 से 800 के बीच इस विश्वविद्यालय की रैंकिंग है।
(6.)इतनी हाइप्रोफाइल फैसिलिटीज होने के बावजूद इतनी नीचे रैंकिंग होने का कारण यही है कि पढ़ाई के बजाय अन्य बातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।वरना ऐसी फैसिलिटी तो प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के विद्यार्थियों को भी उपलब्ध नहीं है जिसकी रैंकिंग टाॅप यूनिवर्सिटी में होती है।
प्रश्न- JNU की घटना के बाद आप को क्या लगता है कि छात्र संगठन किस और जा रहे है?
उत्तर-(1.)JNU के विद्यार्थियों की दिशा गलत है।गीता में कहा गया है कि हमारा कर्म करने पर ही अधिकार है।यानी हम सही कर्म करें या गलत उसका परिणाम हमें ही भोगना होगा। हमारी एवज में कर्म का फल ओर कोई नहीं भोग सकता है।
(2.)जैसे यदि किसी व्यक्ति को दस्त लग जाएं तो दस्त उस व्यक्ति को ही जाना पड़ेगा,उस व्यक्ति की एवज में कोई ओर दस्त नहीं जा सकता है। दूसरा व्यक्ति हमें अस्पताल में ले जाकर दिखा सकता है।दवाई दिलवा सकता है। परन्तु दस्त तो उस व्यक्ति को ही जाना पड़ेगा और दस्त जाने के फलस्वरूप जो कष्ट होगा वो भी उस व्यक्ति को ही भोगना पड़ेगा। जेएनयू की भी यही हालत है।
प्रश्न- जेएनयू में हिंसा करने वाले कौन लोग हैं?
उत्तर-(1.)हिंसा करनेवाले लोग चाहे बाहर के हों या जेएनयू कैंपस के उससे क्या फर्क पड़ता है।क्या जेएनयू के छात्र हिंसा करते तो अपराध कम हो जाता अर्थात् क्या जेएनयू के छात्रों को हिंसा करने का सर्टिफिकेट मिला हुआ है।
(2.)गुंडा देशी हो या विदेशी हो दोनों का अपराध तो बराबर है।
(3.)हिंसा करनेवाले कौन थे ये तो जांच होने के बाद ही पता चल पाएगा। कैंपस में हिंसा की जांच की जिम्मेदारी जॉइंट सीपी (वेस्टर्न रेंज) शालिनी सिंह को दी गई है।
प्रश्न- क्या महाविद्यालय में राजनीतिक दल होना सही है?
उत्तर-(1.) छात्र-छात्राओं को अपनी जायज मांग रखने, छात्र-छात्राओं के हित और कल्याण करने हेतु उनकेे नेतृत्व करनेवाले तो होना ही चाहिए।
(2.) राजनीति करना कोई गुनाह नहीं है परन्तु घटिया किस्म की राजनीति करना सही नहीं है।
(3.)किसी भी अच्छी चीज का उपयोग और दुरुपयोग करना हमारे हाथ होता है।गोयले की अंगीठी में हम हाथों को तपाकर सर्दी से बचाव कर सकते हैैं और उसी अंगीठी से दूसरों के घर फूंक सकते हैं।
(4.) जेएनयू के छात्रों के पक्ष में शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे हैं परन्तु वहीं बम्बई में प्रोटेस्ट करनेवाले अपने हाथों में फ्री कश्मीर की तख्तियां लटका रखी थी।इस तरह से प्रोटेस्ट करना गलत है फिर आपमें और जेएनयू में मारपीट करनेवालों में क्या फर्क हुआ अर्थात् कोई फर्क नहीं है।
प्रश्न- दीपिका पादुकोण का जेएनयू जाना कहाँ तक सही था? क्या इससे उनकी आने वाली फिल्म पर कोई असर पड़ेगा?
उत्तर-(1.) सेलीब्रिटी अथवा राजनेता अधिकांशतः अपने नफा-नुकसान को देखकर ही ऐसा करते हैं।
(2.) जेएनयू में हिंसा की चपेट में आए हुए विद्यार्थियों के प्रति संवेदना प्रकट करने जाने में तो कोई बुराई नहीं है।
(3.) ऐसे लोग जो देश विरोधी कार्यो में लिप्त हैं उनके साथ खड़े होना या उनके साथ प्रोटेस्ट में शामिल होना गलत है।
(4.) मुम्बई में कई सेलिब्रिटीज ऐसे प्रोटेस्ट को समर्थन दे रहे थे जिसमें फ्री कश्मीर के पोस्टर लहरा रहे थे जो कि गलत है।
(5.) हमारे विचार से दीपिका पादुकोण की भावना क्या थी?यह तो वही ज्यादा ठीक तरह से बता सकती है परन्तु उनका मैसेज गलत ही गया है और इसका प्रभाव उनकी आनेवाली फिल्म पर भी पड़ सकता है।
प्रश्न- जेएनयू में हुई हिंसा का जिम्मेदार कौन है?
उत्तर-(1.) हमारी शिक्षा प्रणाली,हमारा सिस्टम जिसमें विद्यार्थियों को अनुशासन में रहना नहीं सिखाया जाता है।
(2.)देश के राजनीतिक दल जो विद्यार्थियों को अपनी राजनीतिक भूमि तैयार करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
(3.) वास्तविक रूप से तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि इस हिंसात्मक गतिविधियों के लिए कौन जिम्मेदार है?
प्रश्न- क्या जेएनयू की घटना के बाद एक छात्र संगठन द्वारा दूसरे छात्र संगठन को बंद करने की मांग करना उचित है?
उत्तर-(1.)हर छात्र संगठन यही चाहता है और यही सिद्ध करने की कोशिश करता है कि छात्र-छात्राओं का सबसे बड़ा हितेषी वही है।
(2.) लोकतांत्रिक व्यवस्था का मतलब तो यह होता है कि एक दूसरे का के विचारों का सम्मान करें यदि सम्मान न भी करें तो अपने काम से काम रखें और एक दूसरे के काम में टांग अड़ाना बन्द करें।
(3.)यदि एक छात्र संगठन यही चाहता है और दूसरा न रहे तो जो छात्र संगठन बचा रहेगा वह भी मोनोपोली करेगा। इसलिए दोनों का रहना आवश्यक है।
(4.)यदि हम यह चाहें कि बुराई बिल्कुल खत्म हो जाए तो हमें अच्छाई के महत्व का पता कैसे चलेगा? दरअसल ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जिन्हें खत्म नहीं किया जा सकता है।
प्रश्न- क्या दीपिका पादुकोण का जेएनयू में जाना भले ही वह आने वाली फिल्म के प्रमोशन के लिए हो जेएनयू में वामपंथियों को समर्थन देना नहीं है?
उत्तर-(1.)दीपिका पादुकोण का मकसद भले ही फिल्म का प्रमोशन हो अर्थात् अपना स्वार्थ सिद्ध करना हो परन्तु वामपंथीयों का भी तो स्वार्थ है। वामपंथ का सूरज डूब रहा है इसलिए किसी न किसी माध्यम से वे भी तो पिक्चर में बना रहना चाहते हैं।
(2.) दोनों का अपना-अपना स्वार्थ है और वो तभी पूरा हो सकता है जब वे एक-दूसरे का समर्थन करें।
प्रश्न- क्या आपको यकीन है कि ABVP के छात्रों ने ही JNU छात्रों पर हमला किया है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-(1.)यह बता पाना तो मुश्किल है क्योंकि दोनों ही संगठनों अर्थात्ABVP,JNUSU तथा अन्य विद्यार्थियों को भी हिंसा का शिकार होना पड़ा है।
(2.)हो सकता है कि कोई तीसरा ही पक्ष हो जिसकोJNU में इस तरह की गतिविधियां पसन्द न हो।
प्रश्न- दीपिका पादुकोण के जेएनयू छात्रों के समर्थन में खड़े होने का क्यों विरोध हो रहा है?
उत्तर-(1.) जेएनयू में जाने में तो कोई हर्ज नहीं है। परन्तु जहां पर तथा जिस समय वह वहां थी उस समय और उनके सामने ही फ्री कश्मीर और आजादी के नारे लगाए जा रहे थे।
(2.)उसको ऐसा करने से रोकना चाहिए था यदि वे नहीं मानते तो उसको वहां नहीं रुकना चाहिए था।
(3.) बाद में भी वह ऐसा स्पष्टीकरण दे सकती थी परन्तु अभी तक भी स्पष्टीकरण न आना क्या दर्शाता है?
प्रश्न- जेएनयू में छात्र विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
उत्तर-(1.)बढ़ी हुई फीस को समाप्त करने के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं।
(2.) प्रोटेस्ट करने तथा पिक्चर में बने रहने के लिए क्योंकि बढ़ी हुई फीस इतनी अधिक नहीं थीं कि उसे न चुका सकते हों।
(3.) विचारधारा के आपस में मेल न होने के कारण अर्थात् सरकार से विपरीत विचारधारा होने के कारण।
प्रश्न- जेएनयू हिंसा में दिल्ली पुलिस को अभी तक कोई ठोस सबूत क्यों हाथ नहीं लग पाया है?
उत्तर-(1.)ज्यादा सही उत्तर तो जेएनयू के छात्र और पुलिस ही दे सकती है।
(2.) हमारे द्वारा दिया गया उत्तर तो अनुमान लगाया उत्तर होगा जो कि हमारे विवेक और न्यूज चैनलों की खबरों के अनुसार होगा वास्तविक तथ्यों के आधार पर नहीं होगा।
(3.)इस प्रकार की जांच में राजनैतिक दबाव भी रहता है और हो सकता है हिंसा करने वाले योजनाबद्ध तरीके से आए हों जिनका पता नहीं चल पा रहा है।
(4.)जांच एजेंसी जांच करने के लिए नए-नए तरीके ढूंढती है तो हिंसा करने वाले भी नए-नए तरीके ढूंढ लेते हैं।
प्रश्न- क्या JNU में हो रहे दंगे आम जनता का रोष है?
उत्तर-(1.) जेएनयू में दंगे दो छात्रों के गुटों का आपसी टकराव है।
(2.) दोनों छात्रों के गुट में एक ABVP जो कि भाजपा समर्थित विचारधारा रखता है, दूसरा गुट JNUSUहै जिसकी वामपंथी विचारधारा है।
(3.)जो विचारधाराओं का टकराव है परन्तु इसमें नुकसान देश को हो रहा है। दोनों ही गुट अपना-अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं।
(4.) दोनों विचारधाराओं में टकराव होना स्वाभाविक है परन्तु ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश की छवि तथा अखंडता को नुक़सान पहुंचता हो।
प्रश्न- JNU हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने किन किन के दोषी होने की सम्भावना प्रकट की हैं ?
उत्तर-(1.)सही जानकारी और सही तथ्यों तक जांच पड़ताल होने तक हमें धैर्य रखना चाहिए।
(2.) पुलिस जिनको दोषी ठहरा रही है जरुरी नहीं है कि वे दोषी ही हों जब तक कोर्ट तथा कानून दोषी नहीं ठहराता है तब तक उनको दोषी कैसे माना जा सकता है।
(3.) किसी भी मामले में हमें अपनी न्याय प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए, उतावलेपन तथा जल्दबाजी के बजाय शांतिपूर्वक हमें धैर्यपूर्वक जांच होने तक इन्तजार रखना चाहिए।
(4.) पुलिस ने तो छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष(छात्र संगठन JNUSU की प्रमुख) के साथ अन्य 9–10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और रोज नए-नए नाम सामने आ रहे हैं। इसलिए हमें इंतजार करना चाहिए।
प्रश्न- क्या जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र आतंकवादी हैं?
उत्तर-(1.): किसी विचारधारा से सहमत नहीं होना अथवा हमारे से विपरीत विचारधारा रखने वाले को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता है।
(2.) आतंकवादी घोषित करने का काम न्याय प्रणाली व कानून का है हमारा काम नहीं है ।
(3.)यदि किसी व्यक्ति में हमें आतंकवादी जैसे गुण दिखाई देते हैं तो हमें एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इसकी इनफॉर्म पुलिस को देनी चाहिए ।हमें किसी व्यक्ति को आतंकवादी प्रमाणित करने अथवा घोषित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है ।
(4.)हमारा केवल इतना ही अधिकार है कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्र विरोधी कार्यवाही मे लिप्त है तो उसकी इंफॉर्मेशन पुलिस तक पहुंचा दें अथवा किसी उचित प्लेटफार्म पर उस सूचना को पहुंचाएं।
(5.)ज्यादा ही गंभीर मामला है इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी सूचना दी जा सकती है परंतु इसका निर्णय लेने का हमें कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
प्रश्न- क्या‌ छपाक' फिल्म को बॉयकॉट करना उचित है?
उत्तर(1.)आपके और हमारे द्वारा छपाक फिल्म को बाॉयकाॅट करने से क्या होगा?
(2.)वामपंथी विचारधारा वाले लोगों और अन्य लोग जो फ्री कश्मीर जैसे नारे लगाते हैं वे समर्थन करेंगे तो फिल्म हिट नहीं होगी तो चलेगी तो जरूर।
(3.)इस देश में वामपंथी विचारधारा और फ्री कश्मीर जैसी विचारधारा रखने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है ।दरअसल इस देश में देशहित को ध्यान में न रखकर दलहित,राजनीति व अपने स्वार्थ को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए इस तरह की विचारधारा को बदलने के लिए समाज की मानसिकता को बदलना होगा और समाज की मानसिकता तब ही बदल सकती है जबकि शिक्षा व ज्ञान शिक्षा राष्ट्रप्रेम को बढ़ावा देने वाली होगी तभी इस देश की दशा और दिशा दोनों परिवर्तित होगी।
 प्रश्न- क्या अब सरकार कोJNU जैसी शिक्षा संस्थाओं में सरकारी ऐड बन्द कर देनी चाहिये क्योंकि कोई भी टैक्स पेयर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई इन छात्रों के वेश में पल रहे गुंडो के ऊपर खर्च करना नहीं चाहेगा?
उत्तर-(1.)गरीब,असक्त और असमर्थ लोगों को अनुदान तथा सहायता देनी ही चाहिए उसमें कोई बुराई नहीं है , कुछ जेएनयू के ऐसे विद्यार्थी हैं जिनको सहायता की आवश्यकता है। जेएनयू कुछ मुट्ठी भर छात्रों की वजह से बदनाम हो रहा है।
(2.) जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों को शहर से दूर किसी ऐसी जगह शिफ्ट करना चाहिए जो राजनीतिक वातावरण से दूर हो।
(3.) प्रोफेसर तथा लेक्चरर्स का स्थानान्तरण दूसरे विश्वविद्यालय में करते रहना चाहिए।
(4.) शिक्षा प्रणाली में भौतिक शिक्षा के साथ-साथ चारित्रिक व नैतिक शिक्षा को भी जोड़ना चाहिए।
(5.) दरअसल जेएनयू ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि हमारे कुछ राजनीतिक दल भी ऐसे हैं जिनकी सहायता से ये मुट्ठी भर विद्यार्थी जेएनयू में ऐसी हरकतें करते हैं। ऐसे राजनीतिक दलो को सोच समझकर वोट देना चाहिए।
(6.) सबसे बड़ी ऐड(ad)तो यह है कि जनता ऐसे लोगों को चुनाव में जीताती है इसलिए ऐसे लोगों को वोट नहीं देना चाहिए।
प्रश्न- जेएनयू के छात्र ज्ञान और नए भविष्य को तलाशने की बजाए छोटी राजनीति में क्यों उलझ रहे हैं?
उत्तर-(1.)राजनीतिक भूमि तथा राजनीति में एंट्री करने का चस्का लग जाता है तो ऐसा ही होता है।
(2.) ईमानदारी से तथा सही तरीके से प्रसिद्धि पाने में वक्त लगता है परन्तु ओछी तथा छोटी राजनीति से जल्दी से जल्दी हाईलाइट हुआ जा सकता है।
(3.) युवा काल में जोश तो होता है परंतु होश नहीं होता है इसलिए इस अवस्था में भटकने के ज्यादा मौक़े होते हैं।
(4.) युवाओं के चरित्र निर्माण करने में माता-पिता तथा शिक्षकों को सजग,सतर्क रहने की आवश्यकता है।
प्रश्न- JNU के छात्र अपने वॉइस चांसलर के विरुद्ध क्यों हैं?
उत्तर-(1.)जेएनयू में वामपंथी विचारधारा के विद्यार्थी पढ़ते हैं और वामपंथी छात्र संघ संगठन JNUSU की अध्यक्ष आइशा घोष वर्तमान में छात्रसंघ अध्यक्ष है।
(2.)JNUSU छात्र संघ संगठन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध है, जबकि जेएनयू में एबीवीपी भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखती है।
(3.) केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद जेएनयू में वाइस चांसलर को 2016 में एस. जगदीश कुमार को नियुक्त किया गया है, छात्र संघ संगठन JNUSU तथा छात्र संघ की अध्यक्ष आइशा घोष उन्हें पसंद नहीं करती है। इसका मतलब यह नहीं है कि जेएनयू के छात्र वाइस चांसलर को पसंद नहीं करते हैं ।
(4.) विपरीत विचारधारा रखने वाले जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशा घोष तथाJNUSU इसलिए वाईस चांसलर का विरोध करते हैं।
Also Read This Article-What is Demerit and solution of Current Indian Education System

5.निष्कर्ष(Conclusion)-

इस देश में भिन्न-भिन्न विचारधारा के लोग रहते हैं,हमारी विचारधारा से कितनी भी अलग विचारधारा वाले लोग हो लेकिन सभी समस्याओं का समाधान वार्ता,मिलजुल कर बैठने,आपस में संवाद करने से हो सकता है।सभी मानवीय समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके और देश की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए खोजे जाने चाहिए।हमारे विचार से इसका समाधान यह हो सकता है-
(1.)तात्कालिक समाधान-
(अ)जो भी छात्र देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं उन्हें विश्वविद्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।
(ब)जेएनयू में कुछ समय के लिए छात्र संगठनों के चुनाव स्थगित कर देना चाहिए।हम स्थाई रूप से चुनाव स्थगित करने के पक्षधर इसलिए नहीं है क्योंकि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है।लोकतंत्र में राजनीतिक दल भाग लेते हैं, यदि शिक्षण संस्थानों से राजनीतिक लीडर तैयार नहीं होंगे तो यह गलत होगा क्योंकि एक तरह से यह राजनीति की प्रयोगशाला है।बहुत से राजनीतिक लीडर्स इन्ही यूनिवर्सिटी में तैयार हुए है।एस जयशंकर प्रसाद,विदेश मंत्री, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
(2)दीर्घकालीन समाधान
(अ)जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों को शहर से बिल्कुल बाहर की तरफ बसाया जाए।
(ब)विश्वविद्यालय में कोई भी नीतिगत निर्णय लेने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाए जिसमें छात्र संघ अध्यक्ष, जो छात्रसंघ अध्यक्ष चुनाव में दूसरे स्थान पर रहा वह छात्र, विश्वविद्यालय के कुलपति,प्रोफेसर,विश्वविद्यालय प्रशासन का कर्मचारी शामिल हो।
(स) भारतीय शिक्षा में चारित्रिक व नैतिक शिक्षा का समावेश हो।
(द) छात्रों और छात्राओं के लिए अलग-अलग शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो।
अन्त में हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि ये हमारे अपने विचार हैं। आपको इससे सहमत होने या न सहमत होने का पूरा अधिकार है। हमने हमारी मोटी बुद्धि के अनुसार  यह आर्टिकल लिखा है इसमें किसी भी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई मकसद नहीं है।हम तो यह चाहते हैं कि इन शिक्षण संस्थाओं में इस प्रकार की समस्याओं का कोई ठोस समाधान निकले।

No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Twitter click here
4. Instagram click here
5. Linkedin click here

0 Comments:

Please do not enter any spam link in the comment box.