google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: How to develop good qualities by education?

How to develop good qualities by education?

शिक्षा द्वारा सद्गुणों का विकास कैसे करें (How to develop good qualities by education?)-

How to develop good qualities by education?
How to develop good qualities by education?
इस आर्टिकल में शिक्षा द्वारा सद्गुणों का विकास कैसे करें (How to develop good qualities by education?) के बारे में बताया गया है।
1.आधुनिक युग में शिक्षा का संबंध रोजगार से जोड़कर देखा जाता है। रोजगार शिक्षा का एक अंग परंतु शिक्षा बहुत गहराई तथा व्यापक अर्थ वाला शब्द है। वर्तमान में जो शिक्षा दी जाती है वह केवल रोजगार प्रदान करने हेतु दी जाती है। शिक्षा के द्वारा विद्यार्थियों में सद्गुणों का विकास भी किया जाता है या की किया जा सकता है। इस वीडियो में कुछ सद्गुणों के विकास के बारे में बताया गया जैसे इ ईमानदारी, आत्मीयता व तेजस्विता इत्यादि हम सभी सद्गुणों का वर्णन नहीं बताएंगे क्योंकि वीडियो ज्यादा लंबा हो जाएगा।
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2.ईमानदारी (Honesty)-

सच्चाई, विश्वसनीयता , धन के लेनदेन व्यवहार में सच्चाई किसी को धोखा न देना , अपनी वस्तु स्थिति से ज्यादा प्रशंसा न करना, छल कपट का सहारा न लेना , कथनी और करनी में अंतर न आने देना इत्यादि को जीवन में अपना और इनके अनुसार व्यवहार करना इ ईमानदारी का पालन करना है बेईमानी को अपने विचारों और कार्यों में समावेश न होने देना । अनीति न करना न    कराना और न उसका समर्थन करना।

3.आत्मीयता (Affinity)-

प्रज्ञावान समषटी का अपने आपको अंग मानना सभी व्यक्तियों को इस प्रज्ञावान समषटी का अंग मानकर भेद से ऊपर उठकर विशाल ह्रदय का प्रमाण देना। संकीर्ण मनोवृति न रखना । सहयोग लेने देने की प्रवृत्ति का विकास करना । मिलजुल कर रहने ,मिल बांट कर खाना और साथ - साथ काम करने में प्रसन्नता अनुभव करना।
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4.तेजस्विता (Spiritedness)-
कठिनाइयों, अड़चनों को पार करते हुए    साहसपूर्वक लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करना ।आदर्शो को अपनाना , मनोविकारों को हटाना, कठिनाइयों में अविचलित रहना। कुर्तियों , अनीतियों का प्रतिरोध कर उनको हटाने का कार्य करना । सन्मार्ग पर चलते हुए मार्ग में आने वाली कठिनाइयों का सामना करना।

5.सदाचार का पालन करना (Abide by virtue)-

जैसा कि हमने बताया शिक्षा एक ऐसा विषय है जो बहुत व्यापक और गहराई का अर्थ लिए हुए हैं । शिक्षा के अंदर समस्त जीवन सम्मिलित हो जाता है । शिक्षा के द्वारा हमारा परिवर्तन होकर जीवन में समग्रता का समावेश होता है । सदाचार से तात्पर्य है कि जो भी सद्गुण है जैसे इमानदारी ,आत्मीयता ,तेजस्विता सत्य बोलना ,चोरी ना करना, ब्रह्मचर्य ,अहिंसा ,संतोष ,स्वाध्याय इत्यादि को पुस्तकों में पढ़ लेना ,वीडियो देख लेना या अन्य कई से ग्रहण करके जीवन में , व्यवहार में पालन करना शास्त्रों में धर्म,कर्म, नीति तथा व्यवहार के बारे में वर्णन किया गया है। हम उन्हें पढ़ लेते हैं तथा याद भी कर लेते हैं परंतु जब तक हम उस पर अमल नहीं करें , जीवन में नहीं उतारे तो वह विद्या हमारे किसी काम की नहीं है। जिस प्रकार बकरी के गले में थन लटके हुए हो तो उनसे दूध नहीं निकलता है। इसी प्रकार पुस्तकों, वीडियो इत्यादि को पढ़ - सुनकर उसको आचरण में न उतारें तो वह भी हमारे लिए किसी काम की नहीं है। अतः विद्या का अभ्यास करना आवश्यक है बिना अभ्यास के शिक्षा (विद्या) विष हो जाती है।

यहां अभ्यास से तात्पर्य है कि विद्या का उपयोग करना अर्थात् विद्या को खर्च करना , बांटना । विद्या एक ऐसा धन है जो खर्च करने से बढ़ती है तथा धन खर्च करने से घटता है। वस्तुतः आज के युग में बालकों को पुस्तक को पढ़कर   कंठाग्र करने पर जोर दिया जाता है ऐसी पुस्तक की  विद्या जीवन में काम नहीं देती।  इसलिए किसी सद्गुण व विद्या को अपने आचरण में उतारना चाहिए । सब बाते कंठाग्र   भी होनी चाहिए और उनको व्यवहार में अथवा उपयोग में लाने का कौशल भी जानना चाहिए । पुस्तक की विद्या और पराए हाथ का धन कार्य पड़ने पर उपयोग में नहीं आता । न वह विद्या है और वह धन है।
सारांश यह है कि किसी भी सद्गुण को शिक्षा के द्वारा अर्जित करने पर न तो उसका चोर  चुरा सकता है और ना ही कोई बंटा सकता है और ना इसका भार हैं।अतः शिक्षा सभी धनो में श्रेष्ठ है यदि इसको आचरण में लाया जाए ।सभी सद्गुण का महत्व भी तभी है जब हम उसको आचरण में उतारेऔर यह शिक्षा के द्वारा संभव है।
इस प्रकार इस आर्टिकल में बताए गए टिप्स के आधार पर शिक्षा द्वारा सद्गुणों का विकास कैसे करें (How to develop good qualities by education?) जान सकते हैं।
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