google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: What are Controversy in Eduation Today?

What are Controversy in Eduation Today?

1.वर्तमान में शिक्षा में क्या विरोधाभास है? (What are Controversy in Eduation Today?)-

वर्तमान में शिक्षा में क्या विरोधाभास है? (What are Controversy in Eduation Today?), इसके बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

(1.)हर व्यक्ति यही कहता है कि बच्चे देश का भविष्य हैं। परन्तु यह जानते समझते हुए भी वह बच्चों के उज्जवल चरित्र और भविष्य को श्रेष्ठ व उन्नत करने में रूचि लेता दिखाई नहीं देता है अर्थात् कथनी व करनी में अन्तर है।

(2.) दरअसल बालक देश का भविष्य हैं इसमें आधुनिक भारत के व्यक्तियों की यह सोच है कि बालक बड़ा होकर नौकरियों के लिए प्रतियोगिता में पड़ना,ऊंचा पद,ऊंचे वेतन और अधिकाधिक पैसा पाना ही अपने जीवन का लक्ष्य माने वही शिक्षा है जबकि शिक्षा व्यक्ति के गरिमा,व्यक्तित्त्व व आचरण से जुड़ती है।जैसी प्रेरणा देने वाली शिक्षा पद्धति होगी वैसी ही प्रवृत्ति के विकास को उस समाज में गौरवान्वित किया जाएगा।

यही कारण है कि वर्तमान भारतीय समाज में यही बात गौरवास्पद समझी जाती है कि उसका बच्चा ऊंचा पद तथा इतना पैसा कमाए जिससे कि उनका यश फैले और बच्चा यशस्वी हो जाए।इस प्रकार बच्चों और युवाओं के लिए यश प्राप्ति का मापदण्ड ऊंचा पद, नौकरी और पैसा अर्थात् कोई बड़ा व्यवसाय करना माना जाता है अथवा जोड़-तोड़ बैठाने में माहिर होकर कोई नेता बने।

(3.)हम बालकों को सच्चरित्र,कर्मठ, आस्थावान, संघर्षशील तथा आदर्शों के लिए अडिग, तेजस्वी के रूप में ढालने का प्रयास नहीं करते हैं।

हम यह तो चाहते हैं कि महर्षि दयानंद सरस्वती,स्वामी विवेकानंद जैसे बच्चे तो पैदा हो लेकिन उनके खुद के घर में पैदा न होकर दूसरे के घर में पैदा हों क्योंकि अपने घर में पैदा हो गया तो वंश नहीं चलेगा।

यह कैसी विचित्र बात है।इस प्रकार की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है।

(4.)दूसरा विरोधाभास ओर देखने को मिलता है कि जो लोग स्वयं शिक्षा-नीति,शिक्षण पद्धति,शिक्षण पाठ्यक्रम,शिक्षण संस्थाएं तथा शिक्षा के मानदण्ड तय करते हैं,बनाते हैं तथा चलाते हैं,वे ही इनकी आलोचना करते हैं।

इस प्रकार की मानसिकता से शिक्षा का ढर्रा कैसे बदला जा सकता है जबकि इसके कर्त्ता-धर्त्ता ही दोहरी मानसिकता रखते हैं।

(5.)तीसरा विरोधाभास यह देखने को मिलता है कि शिक्षा-संस्थान के कर्त्ता-धर्त्ता तो यह समझते हैं कि हमारा कर्त्तव्य पाठ्यक्रम को पूरा कराना है तथा सद्गुणों का विकास करना अभिभावकों व समाज का कार्य है।

दूसरी तरफ समाज,परिवार और अभिभावक यह समझते हैं कि बच्चा शिक्षकों की आज्ञा का पालन ज्यादा करता है व उनके चरित्र का ज्यादा प्रभाव पड़ता है और शिक्षा में पाठ्यक्रम के साथ उनके अन्य गुणों का विकास भी सम्मिलित है।।इस प्रकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से हम सबका ही नुकसान है।

2.वर्तमान में शिक्षा में क्या विरोधाभास है? (What are Controversy in Eduation Today?),को दूर करने का उपाय-

(1.)शिक्षा एक अकेले शिक्षा-संस्थान, परिवार,समाज, शिक्षा-संस्थान व मित्रों तथा अन्य महापुरुषों व संगठनों से अर्जित करता है। अतः इनका जैसा वातावरण व व्यवहार होगा बालक वैसी ही शिक्षा अर्जित करेगा। इसलिए प्रत्येक को अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने या उससे मुंह मोड़ना उचित नहीं है।

(2.) इसलिए जो लोग बच्चे और सम्पूर्ण समाज व देश का भविष्य उज्जवल देखना चाहते हैं, उन्हें अपने द्वारा दिए जा रहे शिक्षण व शिक्षा को उन्नत बनाना होगा। बच्चों के सामने हम स्वयं अपने आचरण से जैसा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, उसके व्यक्तित्त्व को विकसित करने के लिए जितने सजग रहते हैं, उसमें अन्तर्निहित गुणों को उभारने में जितना प्रयास करते हैं उतना ही अच्छा व उचित होगा।यह सब शिक्षण के अंग है।

(3.)अतः प्रत्येक माता-पिता तथा प्रबुद्ध नागरिक को बच्चों में सुसंस्कार डालने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों में श्रेष्ठ संस्कार डालना ही वास्तविक शिक्षण है।व्यक्ति निर्माण का जितना अधिक श्रेष्ठ वातावरण परिवार,समाज एवं शिक्षा संस्थान में होगा बालक का व्यक्तित्त्व उतना ही अधिक विकसित होता जाएगा तभी सुयोग्य नागरिकों की संख्या बढ़ेगी तथा बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।

इस आर्टिकल में हमने वर्तमान में शिक्षा में क्या विरोधाभास है? (What are Controversy in Eduation Today?) के बारे में अध्ययन किया तथा इस विरोधाभास को दूर करने के बारे में अध्ययन किया।

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