google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk Satyam Education: Provide Quality Eduation to Children

Provide Quality Eduation to Children

 1.बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे उपलब्ध कराएं? (How to Provide Quality Eduation to Children?)-

इस आर्टिकल में बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे उपलब्ध कराएं (How to Provide Quality Eduation to Children) के बारे में बताया गया है।

वर्तमान समय में बालकों के रंग-ढंग,चाल-चलन,तौर-तरीकों को देखकर माता पिता,अभिभावक,शिक्षकों तथा देश के प्रबुद्ध जन यह सोचने को विवश हो गए हैं कि बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे उपलब्ध कराएं? (How to Provide Quality Eduation to Children?) अधिकांश स्कूलों में बालकों को व्याख्यान विधि द्वारा पढ़ाया व समझाया जाता है जो कि एक अवैज्ञानिक विधि मानी जाती है।इसलिए आधुनिक युग में शिक्षा के लिए उपयुक्त नहीं जाती है।

मानव जीवन में शिक्षा एवं स्वास्थ्य दो ऐसी आवश्यकताएं हैं जो सरकारी स्तर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।आज हम शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए कुछ टिप्स बताएंगे जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार करना संभव है।

शिक्षक पुराने और परंपरागत तरीके से शिक्षण उपलब्ध कराते हैं। अतः शिक्षकों को समय-समय पर रिफ्रेसर कोर्स कराया जाए तथा रिफ्रेसर कोर्स में उन्हें नवीन तकनीकी की जानकारी दी जानी चाहिए।

शिक्षकों को लीडरशिप के गुर सिखाए जाए तथा उन्हें बताया जाए कि अपने शिक्षण के द्वारा बच्चों के सामने नई पहल करें।बच्चे पहेलियों,संगीत,मॉडल्स तथा खेल-खिलौनो में रुचि रखते हैं।इसलिए उन्हें पहेलियों,संगीत,माॅडल्स तथा खेल-खिलौनों के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाए। अर्थात् अपने शिक्षण में इनका प्रयोग करें।

शिक्षकों को प्रशिक्षित करने से शिक्षा संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी।शिक्षकों को तकनीकी व नई-नई जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी तो अपटूडेट रहेंगे।

समाज के हर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नवीन तकनीकी की जानकारी और उसका इस्तेमाल किया जाना आवश्यक है।इसके लिए शिक्षक-अभिभावक बैठक आयोजित की जानी चाहिए। अभिभावकों को बताया जाए कि बच्चों पर सतत निगरानी रखना उनका कर्तव्य है।केवल शिक्षा संस्थानों पर जिम्मेदारी डाल कर अपने कर्तव्य से विमुख न हो।

अभिभावकों का कर्त्तव्य है कि शिक्षकों के साथ-साथ अपने बच्चों को समय दे। शिक्षा संस्थान और पाठ्यक्रम से संबंधित वार्तालाप करें। और उसके उपरांत नियमित रूप से विद्यालय में शिक्षकों से मिले और अपने बच्चों की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा करें।

जब शिक्षा संस्थान,शिक्षक और अभिभावक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ आधारभूत एवं मूलभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करेंगे तो बालकों ने निश्चित रूप से परिवर्तन लाया जा सकेगा।

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2.व्यावहारिक व क्रियात्मक शिक्षा आवश्यक है (Practical and performative education is necessary for Provide Quality Eduation to Children)-

यहां यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से क्या तात्पर्य है?गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में चारित्रिक शिक्षा, व्यावहारिक शिक्षा व शारीरिक शिक्षा शामिल है।ऐसी शिक्षा बालकों को व्यावहारिक जीवन में आने वाली वास्तविक कठिनाइयों से तो परिचित कराती ही है साथ ही उन कठिनाइयों तथा समस्याओं का मुकाबलाऔर समाधान करना सिखाती है।

वर्तमान में युवा वर्ग डिग्री हासिल करके जब जीवन क्षेत्र में उतरता है तो जीवन की वास्तविक कठिनाइओं से मुकाबला होते ही भाग खड़ा होता है।उसे इन कठिनाइयों से मुकाबला करना सिखाया ही नहीं जाता है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि माता-पिता,अभिभावक नहीं चाहते हैं कि बच्चे खतरों का सामना करें ,यह स्वाभाविक भी है।

परंतु खतरों के सामने माता-पिता या अभिभावक ढाल बनकर न रहे बल्कि एक सहायक के रूप में रूप में रहे। जैसे यदि बालक को तैरना सिखाना है तो पानी में तो कूदना ही पड़ेगा लेकिन बालक जब डूबने लग जाए तब उसे पकड़े और डूबने से कैसे बचा जाता है यह बताया जाए।यदि हम केवल उसे तैरने की किताब पढ़ाकर उसे पानी में नहीं उतारेंगे अर्थात् खतरों के ढाल बनकर रहेंगे तो ऐसा बालक जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना नहीं कर पाएगा।केवल किताबी ज्ञान ही न देकर व्यावहारिक व क्रियात्मक ज्ञान भी दिया जाना चाहिए जिससे बालक स्वयं समस्याओं का समाधान करना सीखें।

उपर्युक्त विवरण में बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे उपलब्ध कराएं? (How to Provide Quality Eduation to Children?) के बारे में बताया गया है।


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