google-site-verification=V6YanA96_ADZE68DvR41njjZ1M_MY-sMoo56G9Jd2Mk What is the concept of discipline? - Satyam Education

What is the concept of discipline?

अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?)-

What is the concept of discipline?
What is the concept of discipline?
अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?) के बारे में बताएंगे।

1.अनुशासन का अर्थ (Meaning of Discipline)-

अनुशासन शब्द अंग्रेजी में Discipline) का पर्याय माना जाता है।परन्तु अनुशासन का पूर्ण अर्थ Discipline नहीं हैं।अनुशासन का शाब्दिक अर्थ है आदेश,शिक्षा,नियंत्रण या शासन,दंड,नियम पालन,नए या पुराने शास्त्रों को सही ढंग से अभ्यास करके सीखने की आत्मारोपित उच्च पद्धति।

अनुशासन का उपर्युक्त अर्थ प्रचलित है परन्तु वास्तव में भारतीय शास्त्रों में अनुशासन का अर्थ बहुत व्यापक और गहरा है।भारतीय धर्मशास्त्रों के अनुसार अनुशासन का अर्थ है ऋषि-मुनियों के उपदेशों,वचनों का पालन करना है।

प्राचीनकाल में लोग गुरुजनों, ऋषियों, मुनियों तथा अनुभवी वृद्धजनों द्वारा जो समाज, परिवार व देश की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए जो नियम बताएं हैं तथा उनका अपने आचरण में पालन किया है वही अनुशासन है।



आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस शिक्षा के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके ।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Also Read This Article-How to provide quality education to child?

2.अनुशासन क्यों महत्त्वपूर्ण है?(Why is discipline important?)-

What is the concept of discipline?
What is the concept of discipline?
साधारण मनुष्यों में इतना विवेक नहीं होता है कि भले-बुरे की पहचान कर सके इसलिए उन्हें मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।वास्तविकता यही है कि ऋषि, मुनियों, ज्ञानीजन,समाज व देश के लिए एक दिशासूचक यंत्र की तरह होते हैं।परन्तु यह मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए लोगों की आस्था व श्रद्धा ऋषि-मुनियों व ज्ञानीजन में होना आवश्यक है।वस्तुत: आज की शिक्षा प्रणाली में अनुशासन का पाठ पढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है।समाज तथा शिक्षा संस्थानों की लोगों पर पकड़ कम होती जा रही है।

लोगों को अनुशासन का पालन कराने वाली इन संस्थाओं,समाज व विद्यालय तथा विभिन्न संगठनों में इसका अभाव पाया जाता है।हम जिस प्रकार के लोगों के साथ रहते हैं उनकी संगति का प्रभाव पड़ता है।मूर्ख,दुष्ट और दुर्जन व्यक्तियों के साथ रहने पर हमारी बुद्धि भी उनके जैसी हो जाती है।ऐसे लोग जिन पर दुर्जन व्यक्तियों की संगति का प्रभाव नहीं पड़ता है,ऐसे लोग परिपक्व होते हैं।जैसे पक्के घड़े पर मिट्टी नहीं चढ़ती है परन्तु साधारण मनुष्य जो बहुत संख्या में है उन पर संगति का प्रभाव अवश्य पड़ता है।इसका अर्थ यह नहीं कि परिपक्व लोगों पर असर पड़ता ही नहीं है,अवश्य पड़ता है जैसे पितामह भीष्म जैसे ज्ञानी दुर्योधन के कहने में आकर राजा विराट की गायों को चुराने के लिए चले गए। 

इसलिए आज समाज पतन के मार्ग की ओर जा रहा है।लोग उच्छृंखल होते जा रहे हैं।उनका नीति,नियम पालन करने में कोई विश्वास नहीं है जो कि हमारे समाज और देश के लिए बहुत ही घातक है।लोग आए दिन हड़ताल कर देते हैं,यातायात बाधित कर देते हैं।इस प्रकार आए दिन ऐसे नुकसान समाज व देश को भोगना पड़ता है।आज के लोग शास्त्रकारों को मूर्ख समझते हैं।यदि उन्हें कोई सदुपदेश दे तो उन्हें बुरा लगता है।

आज मनुष्य को अनुशासन की ज्यादा आवश्यकता है बल्कि आत्मानुशासन (Self-discipline) की ज्यादा आवश्यकता है जिसे हमारी अंतरात्मा स्वीकार करती है।शर्त यही है कि अंतरात्मा शुद्ध और पवित्र हो।

वस्तुत आज का युवा वर्ग और मनुष्य तर्क ज्यादा करता है तथा अपने आप को ज्ञानी और बुद्धिमान समझता है।बड़ों की नीति व सदुपदेश की बातों की वे खिल्ली उड़ाते हैं।प्रत्येक मनुष्य अपनी अंतरात्मा की आवाज के आधार पर अपने से बड़ों,ज्ञानीजनों तथा ऋषियों व सन्तों के सदुपदेश पर अमल करे तो भारत की तस्वीर बदल सकती है।भारत प्राचीनकाल में विश्वगुरु रहा है और आज भी यदि हम अनुशासन का पालन करें तो सच्चे अर्थों में भारत महान् तथा विश्वगुरु हो सकता है।

अनुशासन का महत्त्व हर व्यक्ति के जीवन में होता है परन्तु इसकी नींव बच्चों में ही डाली जाती है।यदि एक व्यक्ति अनुशासित जीवन व्यतीत करता है तो उसे जीवन में बहुत ही कम समस्याओं का सामना करना पड़ता है।यदि सामना होता भी है तो अनुशासन के द्वारा समस्याओं का सामना सफलतापूर्वक कर लेता है।उसके लिए जीवन में सफलता प्राप्त करना आसान हो जाता है।

उपर्युक्त विवरण में अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?) के बारे में बताया गया है।

3.बच्चों को अनुशासन सीखाने की रणनीति (Strategy to Teach Children Discipline)-

What is the concept of discipline?
What is the concept of discipline?
अगर आप अपने बच्चों को बड़ा होने पर एक अनुशासित व्यक्ति के रूप में देखना चाहते हैं तो यह रणनीति आपके बहुत काम आएगी।

माता-पिता होने का दायित्व सिर्फ इतना ही नहीं है कि आप उनका पालन-पोषण कर दें अथवा उनकी आवश्यकताओं को पूरा कर दें।वस्तुतः बच्चों के प्रथम गुरु माता-पिता ही होते हैं।इसलिए बच्चों में संस्कार डालना,अच्छे गुणों का विकास करना तथा अनुशासन सीखना भी माता पिता का कर्त्तव्य होता है।

हर माता-पिता अपने बच्चों को अनुशासन में रखने की कोशिश करते हैं परंतु अनुशासन का पाठ बहुत कम बच्चे सीख पाते हैं।क्योंकि माता-पिता द्वारा अनुशासन सीखाने का तरीका प्रभावी नहीं होता है या थोड़े समय के लिए ही काम आता है।इसका कारण यह है कि बच्चों पर माता-पिता की ममता अनुशासन में रोड़ा बन जाती है।माता-पिता बच्चों को डांटकर या कभी-कभी मारपीट के द्वारा अनुशासित करने की कोशिश करते हैं।इससे बच्चे कुछ समय के लिए भले ही अनुशासन में रह जाएं लेकिन अनुशासन बच्चों के आचरण का अंग नहीं बन पाता है।मारपीट से अनुशासन में रखना नकारात्मक तरीका है इससे बच्चे अनुशासित होने के बजाय उद्दंड हो जाते हैं।हम आपको अनुशासन के कुछ ऐसे आसान तरीके बता रहे हैं जो अनुशासन सीखाने में काफी मददगार हो सकते हैं।

(1.)उपयुक्त शब्दों का चयन करें (Choose the appropriate words)-

हम बच्चों से किस तरह बातचीत करते हैं,यह उनके व्यक्तित्व को प्रभावित करता है अर्थात् माता-पिता के आचरण का बच्चों पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

इसलिए यदि आप बच्चों को अनुशासन में रहना सीखाना चाहते हैं या बच्चों के अंदर किसी विशेष गुण का समावेश करना चाहते हैं तो आपको अपनी बातचीत में बच्चों पर रौब डालने अथवा बहुत ही रूखे अथवा कड़वे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।आपके शब्दों का चयन सकारात्मक, सहज और मधुरता लिए होना चाहिए।आप अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल बने।

वस्तुतः सबसे अधिक बच्चे अपने माता-पिता के आचरण से ही सीखते हैं।यदि माता-पिता अपने जीवन में अनुशासित व संयमित आचरण को अपनाते हैं तो बच्चा स्वयं ही आपसे सीखने की कोशिश करता है।

(2.)नियम निर्धारित करें (Set Rules)-

बच्चोंको अनुशासित करने का तरीका है कि कुछ नियम निर्धारित करें।उन नियमों का पालन करने के लिए बच्चों को  बार-बार रोकने टोकने की जरूरत न पड़े।जैसे-भोजन करने से पूर्व हाथ धोना,सुबह जल्दी उठना,रात को ठीक समय पर सो जाना,अपने कपड़े स्वयं धोना इत्यादि।कोशिश करें कि जो नियम आप निर्धारित करें उन नियमों का पालन छोटे से लेकर बड़ा हरेक पालन करें।इस तरह बच्चे छोटे-छोटे नियमों के द्वारा अनुशासित रहना सीखते हैं।

(3.)परिणाम से बच्चों को अवगत कराएं (Make children aware of the results)-

बच्चों को अनुशासित करने में हो सकता है कि बच्चे आपकी आज्ञा का पालन न करें।ऐसा करने पर उनको मारने या पीटने की बजाय उनको परिणाम के बारे में बताएं। जैसे यदि बच्चा स्कूल का होमवर्क नहीं करता है तो बच्चे से कहें कि यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसे दिन भर बात नहीं करेगी।याद रखें आप परिणाम पर अटल रहे हैं क्योंकि अक्सर माता बच्चों के मामले में जल्दी पिघल जाती है जिससे बच्चे माता-पिता की बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

(4.)नियम तोड़ने पर अपनी नाराजगी जाहिर करें (Express your displeasure at breaking the rules)- 

याद रखें बच्चा आपके कहने से अनुशासन में नहीं रहेगा क्योंकि बच्चे स्वभाव से चंचल होते हैं।बच्चों को अनुशासित करने के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है।इसलिए यदि बच्चा किसी नियम को तोड़े तो उनके साथ मारपीट ना करें और ना ही उन पर चिल्लाए बल्कि बच्चों को कहें कि ऐसा काम करने से आपको दुख पहुंचा है और आप उम्मीद करती हैं कि वो ऐसी गलती को दोहराएगा नहीं।इसलिए अगली बार नियम तोड़ने से पहले बच्चा जरूर सोचेगा।

(5.)अच्छे काम पर पुरस्कृत करें (Reward for good work)-

बच्चों को रिवाॅर्ड के द्वारा भी अनुशासित बनाया जा सकता है।बच्चे के स्थान पर आप खुद सोचिए कि आप जब कोई अच्छा काम करते हैं तो आप उम्मीद करते हैं कि लोग आपकी प्रशंसा करें या उसके लिए आपको रिवाॅर्ड मिले।यही प्रवृत्ति बच्चों की भी होती है।अगर बच्चों को आपने कुछ नियम फोलो करने के लिए कहा है तथा बच्चे उस नियम को फॉलो कर रहे हैं तो उनकी पीठ थपथपाना चाहिए या उनकी प्रशंसा करनी चाहिए या शाम को बच्चों को इसके लिए बगीचे में घूमने ले जा सकती है या उनके लिए रविवार के दिन कोई मनपसंद स्वादिष्ट व्यंजन बना सकती है।बच्चा प्रशंसा या रिवाॅर्ड पाकर अनुशासित होने का प्रयास करेगा।इससे बच्चों में अनुशासन की नींव पड़ने के साथ-साथ अपने जीवन को एंजॉय करना भी सीखेगा।

(6.)बच्चों को जिम्मेदारी दें (Give children responsibility)-

बच्चों को अनुशासित बनाने का यह भी एक प्रभावी तरीका है।दरअसल बच्चों पर कोई जिम्मेदारी आती है तो स्वयं ही अनुशासित हो जाता है।आवश्यक नहीं है कि बच्चों को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए।आप बच्चे से कह सकते हैं कि स्कूल से घर आने पर उसे स्वयं ही कपड़े बदलने हैं और बैग व कपड़ों को उचित जगह पर रखना है।इसके स्थान पर आप बच्चे को रीडिंग रूम की सफाई करने की जिम्मेदारी भी दे सकते हैं।इस तरह छोटी-छोटी जिम्मेदारी देने से बच्चे अधिक जिम्मेदार व अनुशासित बनते हैं।

4.स्वतन्त्रता और अनुशासन में अन्तर (Difference Between Freedom and Discipline)-

What is the concept of discipline?
What is the concept of discipline?
विद्यार्थियों को विचार,अध्ययन तथा निरीक्षण करने की स्वतन्त्रता हो तो उनका बौद्धिक विकास हो सकता है।उसे खेलकूद, शारीरिक विकास की स्वतन्त्रता होनी चाहिए।

(2.) अनुशासन में व्यवहार,आत्म-संयम, उत्तरदायित्व, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना आदि सम्मिलित है।

(3.) बोर्ड ऑफ एजुकेशन के अनुसार अनुशासन वह साधन है जिसके द्वारा बच्चों को व्यवस्था,आचरण और उनमें निहित सर्वोत्तम गुणों की आदत को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

(4.) स्वतन्त्रता तथा अनुशासन में वही सम्बन्ध है जो आत्मा व शरीर में सम्बन्ध है।सच्चा अनुशासन वही है जो स्वतन्त्रता पर आधारित हो।स्वतन्त्रतापूर्वक ग्रहण किया हुआ अनुशासन ही स्थायी होता है।

व्हाइटेड के अनुसार‌ "आदर्श सुनियोजित शिक्षा का उद्देश्य यह होना चाहिए कि अनुशासन स्वेच्छापूर्वक और स्वतन्त्र रूप से हो और स्वतन्त्रता, अनुशासन रखने में अधिक सहायक हो। दोनों सिद्धान्त स्वतन्त्रता और अनुशासन एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं वरन् इन दोनों का बालक के जीवन में ऐसा अनुकूलन होना चाहिए कि वे बालक के व्यक्तित्व के विकास में इधर-उधर होने वाली स्वाभाविक प्रवृत्तियों के अनुसार हो।

तात्पर्य यह है कि बालक को अपने विकास के लिए नियन्त्रित स्वतन्त्रता मिलनी चाहिए क्योंकि पूर्णरूप से स्वतन्त्रता दिए जाने पर बालक स्वतन्त्रता का दुरुपयोग करने लगता है।अध्यापक का चरित्र भी उत्तम होना चाहिए जिससे बालक विनम्र और चरित्रवान बन सकता है।

(5.)यदि बालक को पूर्ण स्वतन्त्रता दी जाए तो कुछ बालक उसका दुरुपयोग करने लगते हैं।जैसे-यदि कोई बालक या मनुष्य यह कहकर कि मुझे पूर्ण स्वतन्त्रता है इसलिए मैं सड़क के बीच चलूंगा।या कोई बच्चा कहे कि मुझे पूर्ण स्वतन्त्रता है कि मैं नहीं पढूंगा।

इस प्रकार की स्वतन्त्रता,वास्तविक रूप में स्वतन्त्रता नहीं है जिसमें कोई नियम या अनुशासन न हो तथा हमें प्रगतिशील और विकास करने में मदद न करती हो।इस प्रकार मनमर्जी के अनुसार करना,जो मन में आए वही करना,कोई रोक-टोक न होना स्वतन्त्रता नहीं बल्कि स्वच्छन्दता है।

(6.)यदि बालकों को अपनी उन्नति व विकास करना है तो हमें कुछ नियमों व अनुशासन का अनुकरण करना होगा जो हमारी उन्नति व विकास में बाधक न हो बल्कि सहायक हो।यदि जीवन में कोई नियम व अनुशासन नहीं होगा तो बिना ब्रेक की गाड़ी का जो हाल होगा अर्थात् बिना ब्रेक की गाड़ी कहीं न कहीं टकराएगी तथा स्वयं को तो नुकसान होगा ही और दूसरों का भी नुकसान हौगा,वही हाल हमारा होगा। इसलिए जीवन में नियम और अनुशासन जो हमारे जीवन के निर्माण में सहायक हो,होना आवश्यक है।

(7.) बहुत अधिक नियम व अनुशासन भी हमारी प्रगति में अवरोधक बन जाते हैं इसलिए नियम और अनुशासन के मामले में मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए।यदि नियम और अनुशासन न हो तो राज्य का शासन,समाज के नीति,नियम, मर्यादाएं सब चौपट हो जाएगी, कोई किसी को कुछ नहीं समझेगा।ये नियम और अनुशासन ही हैं जिनकी वजह से शासन-प्रशासन,समाज व परिवार, शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था बनी रहती है।ये नियम-अनुशासन नैतिक,कानूनी, धार्मिक और राजनैतिक,शैक्षणिक हो सकते हैं।

उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?) के बारे में भली-भांति जान सकते हैं।

5.अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-

प्रश्न:1.अनुशासन के 3 प्रकार क्या हैं? (What are the 3 types of discipline?),अनुशासन के प्रकार (Types of discipline)
उत्तर-हालांकि शिक्षक आमतौर पर अपनी कक्षाओं के लिए अनुशासन की अपनी शैली विकसित करते हैं,अधिकांश अनुशासन रणनीतियों को तीन मुख्य शैलियों या दृष्टिकोणों में वर्गीकृत किया जा सकता है।निवारक अनुशासन (Preventative Discipline)।सहायक अनुशासन ( Supportive Discipline)।सुधारात्मक अनुशासन‌ (Corrective Discipline)।
प्रश्न:2.हमारे जीवन में अनुशासन क्या है? (What is discipline in our life?)
उत्तर-अनुशासन हर किसी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व लक्षणों में से एक है।यह नियमों और विनियमों के एक समूह को संदर्भित करता है जिसका किसी भी कार्य या गतिविधि के दौरान पालन किया जाना है।यह किसी भी कार्य को करते समय ईमानदार, परिश्रमी, प्रेरित और प्रोत्साहित होने का एक तरीका है।अनुशासन व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और संरचना लाता है।यह एक व्यक्ति को जिम्मेदार और सम्मानित होना सिखाता है।अनुशासन छात्रों को अपने अध्ययन के साथ-साथ अपने जीवन के अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और प्रेरित करना सिखाता है।
प्रश्न:3.साधारण शब्दों में अनुशासन‌ क्या है? (What is discipline simple words?)
उत्तर-जीवन में अनुशासन एक महत्वपूर्ण व्यवहार है।यह एक चरित्र विशेषता है जो जीवन में कई अन्य विशेषताओं को व्यक्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।अनुशासन को प्रशिक्षण के रूप में समझाया जा सकता है जो लोगों के नैतिक चरित्र को विकसित करेगा और एक विशेष प्रकार के व्यवहार का उत्पादन करने में मदद करेगा।
प्रश्न:4.शिक्षा में अनुशासन की क्या भूमिका है?(What is the role of discipline in education?),शिक्षा में अनुशासन की भूमिका (The role of discipline in education)
उत्तर-अनुशासन विभिन्न गतिविधियों को समय देने के लिए तनाव-मुक्त वातावरण बनाकर सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है,नियोजन के माध्यम से नियोजन में सुधार करता है और एक दैनिक दिनचर्या को बनाए रखने,सीखने वाले चरित्र को ढालता है और उनकी प्रेरणा को बढ़ाता है, अच्छे उदाहरणों की सेटिंग को सक्षम बनाता है और सकारात्मक योगदान देता है।
प्रश्न:5.शिक्षा में अनुशासन के प्रकार क्या हैं? (What are the types of discipline in education?),शिक्षा में अनुशासन के प्रकार (Types of discipline in education)
उत्तर-कक्षा में अनुशासन के प्रकार निवारक अनुशासन (Preventative Discipline): निवारक अनुशासन रणनीति एक सुरक्षित,कोई टकराव कक्षा वातावरण नहीं बनाती है।सहायक अनुशासन ( Supportive Discipline)।सुधारात्मक अनुशासन‌ (Corrective Discipline)।
प्रश्न:6.आत्मानुशासन (Self-discipline)
उत्तर-आत्म-अनुशासन अपने आप को आगे बढ़ाने, प्रेरित रहने, और कार्रवाई करने की क्षमता है,भले ही आप शारीरिक रूप से लापरवाह महसूस कर रहे हों।स्व अनुशासित ने अपने विकल्पों को आवेगों या भावनाओं से तय नहीं होने दिया।इसके बजाय,उन्होंने दैनिक रूप से सूचित, तर्कसंगत निर्णय लिए।आत्म-अनुशासन अनिवार्य रूप से आपके कार्यों, संवेदनाओं और भावनाओं को नियंत्रित करने की आपकी सुसंगत क्षमता है।
प्रश्न:7.शिक्षा में अनुशासन का अर्थ (Discipline meaning in education)
उत्तर-अनुशासन को अवांछित व्यवहार को सही करने के लिए सजा का उपयोग करके नियमों या मानदंडों का पालन करने के लिए दूसरों को सिखाने के अभ्यास के रूप में परिभाषित किया गया है।एक कक्षा में, एक शिक्षक नियमित दिनचर्या बनाए रखने के लिए अनुशासन का उपयोग करता है, स्कूल के नियम लागू किए जाते हैं, और छात्र सुरक्षित सीखने के माहौल में होते हैं।

Also Read This Article-How to develop good qualities by education?

इस आर्टिकल में अनुशासन की अवधारणा क्या है? (What is the concept of discipline?) तथा अनुशासन क्यों महत्त्वपूर्ण है?(Why is discipline important?) के बारे में बताया गया है।

No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
WhatsApp

About Satyam Education

अपने बारे में:मैं सत्यम एजुकेशन वेबसाइट का मालिक हूं।मैं मनोहरपुर जिला-जयपुर (राजस्थान) भारत पिन कोड -303104 से सत्य नारायण कुमावत हूं।मेरी योग्यता -बी.एससी,बीएड है.मैंने एमएससी के बारे में पढ़ा है।किताबें:मनोविज्ञान,दर्शन,आध्यात्मिक,वैदिक,धार्मिक,योग,स्वास्थ्य और कई अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढी हैं।मुझे M.sc,एम.कॉम.,अंग्रेजी और विज्ञान तक लगभग 15 वर्षों का शिक्षण अनुभव है। (About my self I am owner of Satyam Education website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.)

0 Comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.