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Modern education is useful or harmfulModern education is useful or harmful

1.आधुनिक शिक्षा उपयोगी है या हानिकारक (Modern education is useful or harmful):

आधुनिक शिक्षा उपयोगी है या हानिकारक (Modern education is useful or harmful) इसे जानने के लिए यह जानना आवश्यक है कि शिक्षा क्या है तथा शिक्षा हमारे उद्देश्यों को पूरी कर पा रही है या नहीं कर पा रही है।यह कर पा रही है तो कितना कर पा रही है?

(1.)शिक्षा का उद्देश्य (Aim of Education):

शिक्षा का मूल उद्देश्य है शिक्षार्थी का सर्वांगीण विकास करना।सर्वांगीण विकास एक व्यापक परिभाषा है।संक्षिप्त रूप में कहा जाए तो शिक्षा के निम्न उद्देश्य हो सकते हैं:

(i)छात्रों का मानसिक,चारित्रिक,आध्यात्मिक और शारीरिक विकास करना।

(ii)शिक्षा के द्वारा वस्तुओं का ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ उपयोगी और अनुपयोगी में से उपयोगी को ग्रहण करना व अनुपयोगी का त्याग करना।

(iii)सैद्धान्तिक ज्ञान तथा व्यावहारिक ज्ञान,आदर्श और आचरण, बोध और विवेक में समन्वय उत्पन्न करना।

(iv)व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना तथा कौशल का विकास करना।

(2.)शिक्षा का महत्त्व (Importance of Education):

मनुष्य गरीबी से इतना जलील और छोटा महसूस नहीं करता जितना अशिक्षा के कारण उसको कदम-कदम पर जलालत महसूस करनी पड़ती है।अशिक्षा के कारण मनुष्य कुएं के मेढ़क के समान है।अशिक्षा के कारण व्यक्ति की प्रतिभा सुप्त रह जाती है तथा न ही वह प्रगतिशील समाज का सक्रिय सदस्य बनने की योग्यता रखता है।जीवन में पग-पग पर उसे ठोकरें खानी पड़ती है।प्राचीन काल की बात ओर थी।प्राचीन काल में न्यूनतम आवश्यकताओं में ही व्यक्ति अपना जीवनव्यापन कर लेता था।आपस में ऐसी गलाकाट प्रतिस्पर्धा नहीं थी।आधुनिक युग में तकनीकी विकास के कारण दुनिया छोटी सी महसूस होती है।शिक्षा में आज नित नए अनुसंधान होते रहते हैं।यदि उनसे हम परिचित न हो तो हम पिछड़ जाएंगे।

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(3.)वर्तमान शिक्षा की उपयोगिता (Utility of Current Education):

प्राचीन शिक्षा में शिक्षा के द्वारा चार पुरुषार्थों धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति करना था।वर्तमान शिक्षा में व्यक्ति के  द्वारा दो ही पुरुषार्थों अर्थ और काम की प्राप्त करना रह गया है या कि कर पा रहा है।

वर्तमान शिक्षा में भौतिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।भौतिक शिक्षा के द्वारा अर्थोपार्जन अर्थात् रोजगार प्राप्त किया जा सकता है जिससे उसकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके।भौतिक शिक्षा से रोजगार प्राप्त करके धन कमाया जा सकता है।

सांसारिक कर्तव्यों का पालन करने और जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए धन की आवश्यकता जरूरी है और ऐसा करना भी चाहिए।

संसार के सारे व्यवहार,नीति और संबंधों का निर्वाह करने के लिए धन की आवश्यकता है।इसलिए धन सब कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ है।

इसलिए भौतिक ज्ञान किसी भी पेशे यथा डॉक्टर,इंजीनियर,वैज्ञानिक या अन्य किसी व्यवसाय के लिए आवश्यक है।

सबको साक्षर करने के लिए भौतिक शिक्षा दी जानी जरूरी है।क्योंकि आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करना हर किसी शिक्षक के वश में नहीं है।इसलिए आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा सबको शिक्षित करना बहुत मुश्किल है।इसलिए इस शिक्षा से यह लाभ हुआ है कि सबको शिक्षा उपलब्ध करवाया जाना संभव हुआ है।

स्त्री शिक्षा में भी वर्तमान शिक्षा के द्वारा शिक्षा प्रदान करना सम्भव हुआ है।प्राचीन काल में स्त्री शिक्षा के मामले में बहुत दयनीय स्थिति थी।वर्तमान शिक्षा में सबको समान समझते हुए महिलाओं को भी शिक्षित करना संभव हुआ है।

वर्तमान शिक्षा के द्वारा एक लाभ यह भी हुआ है कि इस शिक्षा में हिंदू,ईसाई,यहूदी,बौद्ध,जैन,मुस्लिम सभी को शिक्षा देना संभव हुआ है।इससे राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है।

इस शिक्षा का एक लाभ यह भी हुआ है कि आज शिक्षा प्राप्त करने का  एकमात्र माध्यम केवल विद्यालय ही नहीं है।बल्कि ऑनलाइन शिक्षा,अनौपचारिक शिक्षा,प्रौढ़ शिक्षा,सोशल मीडिया,इंटरनेट जैसे कई प्लेटफार्म उपलब्ध हुए हैं।वर्तमान शिक्षा आज हर कहीं उपलब्ध है।आप गांव,शहर,ढाणियों में कहीं भी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

(4.)वर्तमान शिक्षा की हानियां (Disadvantages of Current Education): 

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मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य परोपकार करना और धर्माचरण का पालन करते हुए आत्मिक संतोष की अनुभूति प्राप्त करना है।आधुनिक शिक्षा बाल केन्द्रित मानी जाती है परंतु व्यवहार में वर्तमान शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने और रोजगार प्राप्त करने का माध्यम रह गई है।

रोजगार से धन प्राप्त किया जा सकता है।धन से ऐशोआराम,सुविधाभोगी,आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाला जीवन जिया जा सकता है।ऐशोआराम का कोई अंत नहीं है।आज मनुष्य केवल भौतिक सुख सुविधाओं को प्राप्त करने में जुटा हुआ है।

वह ऐशोआराम का जीवन जीना चाहता है।हमारी लालसाओं का कोई अन्त नहीं है।लेकिन व्यक्ति एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा और अंधी दौड़ में शामिल होकर येन केन प्रकारेण भौतिक सुविधाओं को प्राप्त करना चाहता है। धर्मपूर्वक व नैतिक तरीके से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा सुख सुविधापूर्ण जीवन व्यतीत करने तक तो बात ठीक है।परन्तु ऐशोआराम का जीवन व्यतीत करने का कोई अंत नहीं है।

लेकिन हमारी तृष्णाओं,लालसाओं पर नियन्त्रण कौन करे?यह कार्य भी हमें ही करना होगा।इसके लिए धर्म की आवश्यकता है।अपने विवेक को काम लेना होता है।

बुद्धि और ज्ञान से विवेक बनता है।आज ऐशोआराम की जिंदगी जीते हुए भी व्यक्ति शांत और संतोषी नहीं है क्योंकि शांति और संतोष धन से प्राप्त नहीं होता है।इसके लिए धर्माचरण,नैतिक आचरण और आध्यात्मिक ज्ञान की आवश्यकता होती है।

शिक्षा में इन जीवन मूल्यों को शामिल करना बहुत मुश्किल है लेकिन असम्भव नहीं है।मुश्किल इसलिए है कि इन जीवन मूल्यों को शामिल करने से धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार हो-हल्ला तथा शोर मचाते हैं।देश के वातावरण को दूषित करते हैं।

इसलिए इन इन जीवन मूल्यों को शामिल करना तथा बालकों को नैतिक,आध्यात्मिक व चारित्रिक शिक्षा देना हम सभी का दायित्व है।यह शिक्षा हम तभी दे सकते हैं जबकि स्वयं भी इन जीवन मूल्यों को जीवन में अपनाएं।

इसलिए हर माता-पिता को अपने परिवार में इस प्रकार का वातावरण निर्मित करना चाहिए जिससे उनको इन जीवन मूल्यों की सीख मिले।

समाज व विभिन्न धार्मिक संगठनों का भी उत्तरदायित्व है कि वे बच्चों को किसी न किसी प्रकार नैतिक व आध्यात्मिक व धार्मिक शिक्षा देने का प्रयास करें।

हालांकि किसी न किसी माध्यम से हमारे धर्मोपदेशक उक्त मूल्यों की शिक्षा दे रहे हैं परंतु यह नाकाफी है।क्योंकि बच्चा इनके संपर्क में बहुत कम आता है।

इसलिए सरकार को शिक्षा में ऐसे नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को शामिल करना चाहिए जिसे सभी धर्मावलंबियों को कोई आपत्ति नहीं हो।

वस्तुतः सच्ची शिक्षा वही है जिसमें परिवर्तनशीलता,नवीनता तथा प्रगतिशीलता के तत्व शामिल हो।इसलिए आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं को पहचानते हुए कुछ न कुछ जीवन मूल्यों,नैतिक शिक्षा तथा आध्यात्मिक मूल्यों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास करना चाहिए।

2.आधुनिक शिक्षा उपयोगी है या हानिकारक (Modern education is useful or harmful) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.आधुनिक शिक्षा अच्छी है या बुरी? (Is modern education Good or bad?):

उत्तर:वहीं अगर कोई व्यक्ति विज्ञान या गणित के बारे में सीखना चाहता है तो उसके लिए आधुनिक शिक्षा अच्छी है।  दोनों प्रकार की शिक्षा समान रूप से महत्वपूर्ण है।  पारंपरिक शिक्षित अक्सर हमारी संस्कृति से जुड़ा होता है।  और यह अच्छा है या हम कह सकते हैं कि अपनी संस्कृति के बारे में सीखना महत्वपूर्ण है।

प्रश्न:2.आधुनिक शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है? (Why is modern education important?):

उत्तर:आधुनिक शिक्षा सीखने का एक गतिशील तरीका है जो छात्रों को बहुत तेजी से सीखने में सक्षम बनाता है।छात्र और शिक्षक के बीच की बातचीत छात्रों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।आधुनिक शिक्षा छात्रों को केवल सीखने के अलावा और भी बहुत कुछ करने की अनुमति देती है और उन्हें अधिक सामाजिक और संवादात्मक बनने में मदद करती है।

प्रश्न:3.अच्छी आधुनिक शिक्षा क्या है? (What is good modern education?):

उत्तर:आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लाभ

दूरस्थ शिक्षा:आप किसी भी विश्वविद्यालय में अध्ययन कर सकते हैं।छात्र-केंद्रित:ऑनलाइन शिक्षा छात्र-केंद्रित है।छात्र उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है जहां उन्हें सुधार करने की आवश्यकता होती है और उन्हें गहन ज्ञान देता है।कम लागत: कोई यात्रा लागत नहीं है जैसा कि आप घर से सीख सकते हैं।

प्रश्न:4.आधुनिक शिक्षा पारंपरिक शिक्षा से कैसे बेहतर है? (How is modern education better than traditional education?):

उत्तर:पारंपरिक में लिखित परीक्षा शामिल नहीं है लेकिन इसमें कुछ मौखिक परीक्षण शामिल हैं जो बहुत औपचारिक नहीं हैं।पारंपरिक शिक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग से बहुत दूर है।आधुनिक शिक्षा आज आवश्यक कौशल के बारे में सिखाती है जो कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कौशल,चिकित्सा विज्ञान आदि का विज्ञान है।

प्रश्न:5.शिक्षा व्यवस्था खराब क्यों है ? (Why education system is bad?):

उत्तर:हमारे स्कूलों में भीड़भाड़ है।

नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स के एक अध्ययन में पाया गया कि 14 प्रतिशत अमेरिकी स्कूल क्षमता से अधिक हैं।ऐसे समय में जहां बच्चों को सफल होने के लिए पहले से कहीं अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है,भीड़भाड़ वाली कक्षाएँ सीखना और भी कठिन बना रही हैं और शिक्षकों के लिए प्रभावी होना अभी भी कठिन है।

प्रश्न:6.आज हमारी शिक्षा प्रणाली में क्या खराबी है? (What's wrong with our education system today?):

उत्तर:स्कूलों के लिए सरकारी वित्त पोषण में कमी।फंडिंग हमेशा स्कूलों के लिए एक मुद्दा है और वास्तव में,आज अमेरिकी सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली का सामना करने वाले सबसे बड़े मुद्दों में से एक है।कम फंडिंग का मतलब है कम शिक्षक,कम कार्यक्रम और कम संसाधन।

प्रश्न:7.आज शिक्षा के प्रमुख मुद्दे क्या हैं? (What are the major issues in education today?):

उत्तर:शैक्षिक प्रणाली के संबंध में मुद्दे

शिक्षा की गुणवत्ता।जिसमें सबसे पहले शिक्षा की गुणवत्ता है।

शिक्षा के लिए बजट।

शिक्षा की वहनीयता (Affordability of Education)।

ड्रॉप-आउट दर (स्कूल से बाहर युवा) [Drop-out Rate (Out-of-school youth)]

बेमेल (Mismatch)।

प्रतिभा पलायन (Brain Drain)।

सामाजिक विभाजन (Social Divide)।

सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और शिक्षकों की कमी (Lack of Facilities and Teacher Shortage in Public Schools)।

प्रश्न:8.आज शिक्षा में क्या समस्याएं हैं?(What are problems in education today?),आज छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? (What is the biggest challenge faced by students today?),आज छात्रों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? (What are the challenges facing students today?):

उत्तर:आज शिक्षा की दुनिया में शामिल कई लोगों के परिप्रेक्ष्य के आधार पर,पब्लिक स्कूलों के सामने वर्तमान में 8 प्रमुख चुनौतियों की इस सूची पर विचार करें।

कक्षा का आकार (Classroom Size)।

गरीबी (Poverty)।

पारिवारिक कारक (Family Factors)।

प्रौद्योगिकी (Technology)।

धमकाना (Bullying)।

छात्र दृष्टिकोण और व्यवहार।

कोई बच्चा पीछे नहीं छूटा (No Child Left Behind)।

माता-पिता का दख़ल (Parent Involvement)।

प्रश्न:9.शिक्षा प्रणाली में क्या समस्याएं हैं? (What are the problems in education system?):

उत्तर:शिक्षा की प्रगति में आने वाली मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं:

धन की कमी (Lack of funds):

महंगी उच्च शिक्षा (Expensive higher education):

भारतीय भाषाओं की उपेक्षा (Neglect of Indian languages):

ब्रेन ड्रेन की समस्या (Problem of Brain drain):

बड़े पैमाने पर निरक्षरता (Mass illiteracy):

संसाधनों की बर्बादी (Wastage of resources):

सामान्य शिक्षा उन्मुख (General education oriented):

प्राथमिक शिक्षा की समस्याएं (Problems of primary education):

प्रश्न:10.स्कूल रचनात्मकता को क्यों मारते हैं? (Why do schools kill creativity?):

उत्तर:शिक्षाविद् सर केन रॉबिन्सन एफआरएसए (Sir Ken Robinson FRSA) ने अब तक के सबसे अधिक देखे जाने वाले टेड टॉक (TED talk) में दावा किया है कि "स्कूल रचनात्मकता को मारते हैं (schools kill creativity)",यह तर्क देते हुए कि "हम रचनात्मकता में नहीं बढ़ते हैं,हम इससे बाहर निकलते हैं।या यों कहें कि हम इससे शिक्षित हो जाते हैं ”।"सच्ची रचनात्मकता" उनका तर्क है,"ज्ञान पर आधारित है जो बदले में साक्षरता पर आधारित है"।

प्रश्न:11.आज शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? (What is the greatest challenge facing teachers today?):

उत्तर:शिक्षकों के अनुसार शीर्ष 8 कक्षा की चुनौतियाँ

योजना के लिए समय की कमी (Lack of Time for Planning)।

बहुत सारी कागजी कार्रवाई (Lot of Paperwork)।

स्कूल प्रशासकों से प्रदर्शन का दबाव (Performance Pressure from School Administrators)।

विविध सीखने की जरूरतों को संतुलित करना (Balancing Diverse Learning Needs)।

बहुत सारे स्वामी को संभालो (Handle too many masters)।

आसानी से बर्न आउट हो जाओ (Get Burn out Easily)।

उचित वित्त पोषण का अभाव (Lack of proper funding)।

मानकीकृत परीक्षण की सीमाएं (Limitations of standardized Testing)।

प्रश्न:12.आप शिक्षा से क्या बदलाव की उम्मीद करते हैं? (What is the greatest challenge facing teachers today?):

उत्तर:होमवर्क का कम बोझ,मार्क्स का दबाव और रैंकिंग सिस्टम।इसके आधार पर हम देश में शिक्षा और विकास के संबंध में अच्छा उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं।  सभी विषयों के बीच संतुलन: जन्म से ही हर बच्चे की अपनी क्षमताएं होती हैं।

प्रश्न:13.हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को बदलने की आवश्यकता क्यों है? (Why do we need to change our education system?):

उत्तर:यह एक कारण है कि हमारी स्कूल प्रणाली को बदलने की जरूरत है।"अगर हमारे स्कूल अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण भविष्य का सामना करने के लिए बच्चों को मानसिकता और कौशल से बेहतर ढंग से लैस करने के लिए और अधिक कर सकते हैं,तो उन्हें ऐसा करना चाहिए।"माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अकादमिक रूप से अच्छा करें,एक अच्छी नौकरी पाने के लिए और खुश रहें।

प्रश्न:14.क्या हमें अपने देश में वर्तमान शिक्षा प्रणाली को बदलना चाहिए? (Should we change the present education system in our country?):

उत्तर:स्कूलों और संस्थानों को व्यक्ति के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

शिक्षा वाले स्कूलों और संस्थानों को मूल्यों और शिष्टाचार की शिक्षा देनी चाहिए।

सिस्टम स्वचालित रूप से बदल रहा है और छात्रों को अपने कौशल में सुधार करने में मदद करने के लिए नए और आधुनिक विकल्पों को शामिल कर रहा है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा आधुनिक शिक्षा उपयोगी है या हानिकारक (Modern education is useful or harmful) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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About Satyam Education

अपने बारे में:मैं सत्यम एजुकेशन वेबसाइट का मालिक हूं।मैं मनोहरपुर जिला-जयपुर (राजस्थान) भारत पिन कोड -303104 से सत्य नारायण कुमावत हूं।मेरी योग्यता -बी.एससी,बीएड है.मैंने एमएससी के बारे में पढ़ा है।किताबें:मनोविज्ञान,दर्शन,आध्यात्मिक,वैदिक,धार्मिक,योग,स्वास्थ्य और कई अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढी हैं।मुझे M.sc,एम.कॉम.,अंग्रेजी और विज्ञान तक लगभग 15 वर्षों का शिक्षण अनुभव है। (About my self I am owner of Satyam Education website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.)

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